सच अब है ही कौन यहाँ?
बनावटीपन भरा रगो में बेतहाशा,
फीकी हंसी की इस दुनिया में
झूठा है आईना, तो क्या हुआ....?
रंग बदलते लोग हर तरफ हैं,
मुँह फेरते बजूद संग बेमतलब हैं,
मक्कारी से चित्त अब लबालब हैं,
ठोकर अपनों ने दी तो क्या हुआ?
फीकी हंसी की इस दुनिया में
झूठा है आईना, तो क्या हुआ....?
टांग खींचतें दोस्त मिल जायेंगें,
पाप सीखातें सगे बहुत मिल जायेंगें,
डींग हांकते खुद ही खुदा हो जायेंगें,
तुम देर से ये समझे, तो क्या हुआ?
फीकी हंसी की इस दुनिया में
झूठा है आईना, तो क्या हुआ....?
जाल जो तुम्हारे सामने बुना है,
मजबूत हो वो, ये तुमने कहा है,
न समझे ये कि तुम्हारे लिये ही बना है,
तैराक तुम गहरे हो,करो ये दुआ
फीकी हंसी की इस दुनिया में
झूठा है आईना, तो क्या हुआ....?
कम से कम शक्ल तो दिखाता है,
दिल की बात,आँखों में दिखलाता है,
और बता आईने से तू क्या चाहता है?
फिर आईना तो तेरा प्रतिबिंब ही हुआ
फीकी हंसी की इस दुनिया में
बताओ कैसे आईना झूठा हुआ....?
स्वरचित व मौलिक✍
सुमित सिंह पवार "पवार"
उत्तर प्रदेश पुलिस
आगरा

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