सुबह-सुबह, दूर कहीं से गाने की आवाज सुनकर, दीपा की आंख खुली । वह मुस्कुरा दी और वही गाना गुनगुनाती हुई उठी ।
आ चल के तुझे, मैं लेके चलूं, एक ऐसे गगन के तले
जहां गम भी न हो आंसू भी ना हो बस प्यार ही प्यार पले ।
रेखा और दीपा स्कूल जाते हुए,
"तुमने कल चित्रहार देखा ?"
"हां, और नहीं तो क्या । कितने अच्छे - अच्छे गाने आए थे ना ?"
"देवानंद का वह गाना मैंने पहली बार देखा था ।
दिल का भंवर करे पुकार प्यार का राग सुनो ।"
"नहीं, मेरा तो देखा हुआ था । पता है, वह कुतुब मीनार के अंदर का सीन था । हां, देखने और सुनने में मजा ही आ
गया ।"
"और आराधना फिल्म के गाने में राजेश खन्ना का मुंह देखा था । कैसा पागल जैसा मुंह बनाकर, शर्मिला टैगोर के पीछे घूम रहा था । उसकी शक्ल देखकर हंसी आ रही थी ।"
"हां, लेकिन गाना तो बहुत अच्छा है वो । मेरा तो फेवरेट है ।
रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना
भूल कोई हमसे ना हो जाए ।"
दोनों बातें करते, हंसते हुए, स्कूल पहुंच जाती हैं ।
रात को-
"गुंजन, चल अंताक्षरी खेलते हैं। सब बच्चों को बुला ले ।"
"दीपा, तू मेरी टीम में रहना ।"
"नहीं, दीपा मेरी टीम में रहेगी ।"
"मैं, तुम दोनों की टीम में ही नहीं रहूंगी । तुम दोनों की टीम एक तरफ और मैं अकेली । अब ठीक है ना । लड़ाई खत्म करो और अंताक्षरी शुरू करो ।"
"समय बिताने के लिए करना है कुछ काम
शुरु करो अंताक्षरी ले प्रभु का नाम ।"
"म से गीत गाओ ।"
"मैं ना भूलूंगा मैं ना भूलूंगी
इन रस्मों को इन कसमों को
इन रिश्ते नातों को ।"
"क से गाओ, अब तुम्हारी बारी ।"
"कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में बीत ना जाए रैना ।"
"न अक्षर से गाना गाओ ।"
"ना तुम हमें जानो
ना हम तुम्हें जाने
मगर लगता है कुछ ऐसा
मेरा हमदम मिल गया ।"
"य य य से गाना है ।"
"यूं ही तुम मुझसे बात करती हो
या कोई प्यार का इरादा है ।"
"ह से सुनाओ गाना ।"
"हां, तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे ।"
अंताक्षरी एक बार शुरू हुई तो चलती ही गई ।
गुंजन बोली, "भई दीपा को अंताक्षरी में हराना बहुत मुश्किल है । अकेली ही सब का मुकाबला कर रही है ।"
तभी दीपा की मां ने आवाज लगाई,
"दीपा ओ दीपा, तुम्हें सोना नहीं है । क्या रात भर गाने ही गाती रहेगी ?"
"चलो भई चलो, मां की आवाज आ गई ।
कल की हंसी मुलाकात के लिए
आज रात के लिए
हम तुम जुदा हो जाते हैं
अच्छा चलो सो जाते हैं ।"
दीपा ने अपनी ही एक छोटी - सी गीतों भरी दुनिया बना रखी थी । जिसमें वह मस्त रहती । बाहरी दुख - सुख की वह ज्यादा परवाह नहीं करती थी । दुनियादारी और चालाकी, चतुराई से परे, वह अपने गीतों के बीच सुकून महसूस करती ।
घर में दो छोटे भतीजों के साथ, वह खेलती और उन्हें गाने सुनाती रहती ।
"बुआ मेरे नाम वाला गाना सुनाओ ।"
मन्नू भाई मोटर चली पम पम पम
है मन्नू भाई मोटर चली पम पम पम
दीपा की मां बोलती, "बेटी, अब यह गाने - वाने में ध्यान मत लगा । घर का काम सीखो । तुम्हारी शादी होने वाली है ।"
"मां, गानों का काम से क्या संबंध ? तुम देखना, मैं ससुराल में सब को खुश भी रखूंगी और कुशलता से काम भी
करूंगी । उन्होंने तो मुझे दिवाली के गिफ्ट में, सोनू निगम के गानों की कैसेट भेजी है । इसका मतलब है, उनको भी गाने सुनना पसंद है । उस कैसेट का एक गाना तो बहुत ही अच्छा है ।
सोचा सौ दफा, तुमसे कहूं, अब ये फासले, कैसे सहूं
ये ना हो सका, तुमसे पूछ लूं, कैसे जियूं क्या करूं ।"
शादी के बाद
"दीपा, मैंने सुना है, तुम्हें गीत सुनना और गाना पसंद है ।एक गीत मुझे भी सुनाओ ।"
"ये जीवन है, इस जीवन का
यही है यही है रंग - रूप
थोड़े गम है, थोड़ी खुशियां
यही है यही है छांव - धूप ।"
कुछ सालों बाद
"रिशु, सनु, आओ, चलो खाना खाने का टाइम हो गया ।" "मम्मी, हमें आप गाना सुनाओ, तो ही खाएंगे ।"
"ठीक है, तुम लोग खाना शुरू करो । मैं गाना सुनाती हूं ।
चंदा है तू
मेरा सूरज है तू
ओ मेरी आंखों का तारा है तू ।"
"मम्मी, मुझे स्कूल में गणतंत्र दिवस पर कविता सुनानी है । तैयारी करा दो ।"
"सनु, तुम कविता नहीं, गीत सुनाना । मैं तुम्हें सिखा दूंगी । चलो मेरे साथ गीत गाओ । ध्यान से सुनना, गाने में कहां सांस लेनी हैं, कहां आवाज नीचे और कहां ऊंची रखनी है, ठीक है ।
ए वतन ए वतन
हमको तेरी कसम
तेरी राहों में जां तक लुटा जाएंगे
फूल क्या चीज है
तेरे कदमों पे हम
भेंट अपने सरों की चढ़ा जाएंगे
ए वतन ए वतन ।"
"मम्मी, आपने जो गाना सिखाया था, वह सब को बहुत पसंद आया । सबने बहुत तालियां बजाई मेरे लिए ।" सनु ने स्कूल से आ कर दीपा को खुश होते हुए बताया ।
बच्चों ने दीपा को हमेशा गीत गुनगुनाते, हंसते - खेलते ही देखा ।
जब बच्चे बड़े हो गए उन्होंने पूछा,
"मम्मी, आपका फेवरेट गाना कौन सा है ?"
"मेरे फेवरेट गानों की लिस्ट लंबी है । मैं एक बार शुरू हो गई तो रुकने वाली नहीं हूं ।
1 वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है ।
2 है दुनिया उसी की ज़माना उसी का, मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का ।
3 जैसे राधा ने माला जपी श्याम की ।
4 ये शाम मस्तानी मदहोश किए जाए ।
5 कर चले हम फिदा जानो तन साथियों ।"
"बस, बस, बस मम्मी, हम समझ गए । आप की लिस्ट वाकई बहुत लंबी है । हम नहीं रोकेंगे तो आप रूकने वाली नहीं हो ।"
जब भी दीपा उदास होती तो गीतों से ही उसे प्रेरणा
मिलती ।
एक अंधेरा लाख सितारे
सबसे बड़ी सौगात है जीवन
नादां है वो, जीवन से हारे ।
इसी तरह उतार-चढ़ाव के साथ, दीपा का जीवन बीतने
लगा । हर खुशी और गम में गीत उसके साथ रहते । उसका तन जरूर बूढ़ा हो रहा था लेकिन मन अभी भी बचपन जैसा था । दीपा याद करती, अपने पहले गीत को जो उसे बहुत पसंद आया था ।
'इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ा कि मैं एक बादल आवारा'
इस गीत के फिल्म का नाम जानने के लिए वह रेडियो पर कान लगाए रखती । रेडियो से आने वाली आवाज का उसे सब कुछ समझ आता लेकिन फिल्म का नाम आते ही कान बंद हो जाते । जब तक फिल्म का नाम ना जान लिया, दीपा को चैन नहीं पड़ा । अपनी हरकत को याद कर दीपा, खुद ही मुस्कुरा देती ।
धीरे-धीरे वक्त बीतता गया । दीपा अपनी ही गीतों की दुनिया में मस्त, घर की जिम्मेदारियां संभालती, बुढ़ापे की दहलीज तक पहुंच गई । उसका अंत समय आ गया ।
डॉक्टर ने कहा, "अब हम कुछ नहीं कर सकते । आप इन्हें घर ले जाएं ।"
दीपा के मन में जो था, वह कह नहीं पा रही थी और बिन कहे, कोई समझ नहीं पा रहा था । उसकी सांसें अटकी हुई थी । तभी दूर से उसे गीत सुनाई देने लगा । वह उस गीत को सुनने और समझने की कोशिश करने लगी । जैसे - जैसे गीत उसे समझ आने लगा, उसकी आंखों की खुशी बढ़ने लगी ।
जिंदगी का सफर
है ये कैसा सफर
कोई समझा नहीं
कोई जाना नहीं
है ये कैसी डगर
चलते हैं सब मगर
कोई समझा नहीं
कोई जाना नहीं ।
गीत सुनते - सुनते दीपा हमेशा के लिए शांत हो गई ।

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