शुकून पाऊं मैं प्यास में
जब साथी भर अंजुली
नीर से प्यास बुझाए,
तृप्त हो जाए आत्मा
जब प्रिये जल संग प्रेम
पिलाए,
थम जाएं वो क्षण जब,
लब प्रियतम की हथेली
को चुम खुद सागर बन जाए,
प्रेमी हो जाएं घटाएं
प्रेम बारिश से ‌मन भींग जाए,
मैं रह लूं प्यासी, जब
प्रिये अंजुली से प्यास बुझाए।।

प्रिया ❤️✍️