कंचन एक पढ़ी - लिखी और समझदार लड़की थी । बचपन से ही वह इतनी समझदार थी कि उसने अपनी जिंदगी में उसे किस उम्र में क्या - क्या करना है और क्या नहीं करना है यह प्लानिंग कर ली थी । पढ़ने में भी वह बहुत तेज थी और हमेशा फर्स्ट ही आती थी । कंचन को वैसे तो किसी भी चीज से कोई समस्या नहीं थी लेकिन उसे प्यार , मोहब्बत , इश्क और प्रेम पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं था और इसका कारण उसके घर में ही मौजूद था और वह कारण उसके खुद के मम्मी-पापा ही थे । बचपन से ही वह अपने मम्मी - पापा को लड़ते - झगड़ते ही देखती आ रही थी । कंचन को तो वो दोनों बहुत प्यार करते थे लेकिन उनकी आपस में बिल्कुल ही नहीं बनती थी । कंचन की मम्मी का यह कहना था कि उसके पापा ने उसे कभी समझा ही नहीं । घर संभालने वाली से आगे का दर्जा कंचन की मम्मी को कभी मिला ही नहीं इसलिए दोनों की हमेशा लड़ाई होती ही रहती थी और कंचन इन सब से हमेशा डिस्टर्ब होती थी और उसके दिमाग पर ऐसा असर हुआ कि उसकी यह सोच बन गई कि पति - पत्नी के बीच प्यार , मोहब्बत होता ही नहीं है। स्कूल में भी जब उसकी सहेलियाॅं जोड़े बनाने में लगी हुई थी तब भी कंचन ने सिर्फ अपनी किताबों को ही अपना जोड़ा बनाया हुआ था।
कंचन आज एक कामयाब वर्किंग गर्ल बन चुकी थी और उसने यह सब प्लानिंग किए हुए वर्ष में ही हासिल कर लिया था । कंचन के पिता को अब कंचन की शादी की चिंता थी क्योंकि कंचन शादी ही नहीं करना चाहती थी । जब भी उसके पापा उसकी शादी की बात उससे करने की कोशिश करते वह गुस्से में वहाॅं से उठ कर भाग जाती थी । कंचन के पापा कंचन को प्यार से , गुस्से से सब तरह से समझा कर थक गए थे लेकिन कंचन की अपनी शादी के लिए ना , हाॅं में नहीं बदल पाई । कंचन की मम्मी ने भी कंचन को समझाने की कोशिश की लेकिन कंचन का एक ही जवाब होता था कि आप शादी करके खुश हैं मम्मी ! जो मैं रहूॅंगी । कंचन की मम्मी उसे समझाती कि सब तुम्हारे पापा जैसे नहीं हैं । हम देख - सुनकर तुम्हारे लिए लड़का ढूॅंढेंगे या तुम्हें कोई पसंद है तो हमें बताओं । कंचन इस बात से भी गुस्सा हो जाती और अपनी मम्मी से कहती :- मम्मी ! मुझे कोई भी लड़का पसंद नहीं है और आगे भी कोई नहीं होगा इसतरह कंचन की शादी की बात रह जाती । समय बीतता गया और समय के साथ-साथ कंचन की मम्मी बीमार रहने लगी ।
एक दिन कंचन की मम्मी कंचन से कहती है :- बेटा ! मैं मरने से पहले तुम्हें दुल्हन के रुप में देखना चाहती हूॅं । क्या अपनी मम्मी को यह भी सुख नहीं दोगी तुम । कंचन कहती है :- मम्मी ! मैं आपको खुश करने के लिए कुछ भी कर सकती हूॅं लेकिन यह नहीं कर सकती । कंचन की मम्मी बेटी की बातें सुनकर दुखी हो जाती । कंचन की मम्मी की दिन - प्रतिदिन तबीयत बिगड़ती ही जा रही थी । यह देखकर कंचन ने एक दिन अपनी मम्मी की इच्छा को पूरा करने के लिए शादी के लिए हाॅं कर दी । कंचन की मम्मी बहुत खुश हुई और इस तरह कंचन की पहले तो विवेक से सगाई हुई और एक सप्ताह के अंदर ही शादी भी हो गई । विवेक तो कंचन को सगाई वाले दिन से ही पसंद करने लगा था लेकिन कंचन उससे दूर ही रहती थी । कंचन और विवेक की शादी को दो दिन भी नहीं हुए थे कि कंचन की मम्मी भगवान को प्यारी हो गई । कंचन अपने मायके आ गई । कंचन अपने पापा की अपेक्षा अपनी मम्मी के ज्यादा नजदीक थी इसलिए वह अपनी मम्मी के जाने से बहुत दुखी थी । इस बीच विवेक उसके मायके आता भी तो कंचन कुछ नहीं करती थी । उसके खाने - पीने का सारा बंदोबस्त उसके पापा और नौकर ही देखते थे । कंचन की हालत देखकर विवेक दुखी हो जाता था और कंचन को खुश रखने की कोशिश करता भी था लेकिन कंचन उसपर ध्यान ही नहीं देती थी । आजकल अपने में ही गुम रहने लगी थी कंचन । विवेक उसे बाहर घुमाने ले जाने की बात भी करता तो वह मना कर देती । उसने अपने ऑफिस से भी छुट्टी ले ली थी । विवेक , कंचन के व्यवहार को समझ ही नहीं पा रहा था जितना वह कंचन के करीब जाने की कोशिश करता वह उससे दूर भागती थी ।
कंचन के पापा कंचन को जानते थे एक दिन उन्होंने कंचन को समझाते हुए कहा कि अब तुम्हें तुम्हारे ससुराल चलें जाना चाहिए । कंचन के पापा ने विवेक को भी बुला रखा था इसकारण कंचन बिना कुछ कहे विवेक के साथ ससुराल आ गई और अगले ही दिन से ऑफिस भी जाने लगी । कंचन हमेशा कोशिश करती कि विवेक से उसका कम ही सामना हो । कंचन की सास भी बहुत अच्छी थी । विवेक का परिवार कंचन के व्यवहार को देख समझ रहा था लेकिन उन्हें लगता था कि माॅं के गुजर जाने के कारण कंचन अपसेट हैं इसलिए कोई भी उससे कुछ नहीं कहता था ।
एक दिन विवेक को अपने ससुर का फोन आया कि कंचन की तबीयत ऑफिस में खराब हो गई है आप उसके ऑफिस जाकर उसे ले आओ । विवेक जल्द से जल्द कंचन के ऑफिस पहुॅंचा और देखा कि कंचन को तो तेज बुखार है जिसके कारण वह बेहोश हो गई थी । वह कंचन को लेकर अस्पताल जाता है और वहाॅं से इलाज कराके घर आता हैं
पूरी रात वह कंचन की पट्टियां बदलते रहता है क्योंकि कंचन को बहुत तेज बुखार होता है । विवेक कंचन की यह हालत देखकर रोने लगता है तब विवेक की मम्मी उसे समझाती है और भगवान पर विश्वास रखने को कहती हैं । विवेक की पट्टियां और डाॅक्टर की दवाईयों का असर होना शुरू होता हैं और कंचन का बुखार कम होने लगता है ।
विवेक सारी रात कंचन के पास ही बैठा रहता है । कंचन को जब सुबह में प्यास लगती है तो वह देखती है कि विवेक उसके पास ही कुर्सी पर बैठे - बैठे ही सो रहा है । कंचन का यह पहला अनुभव होता है जिसमें वह देखती है कि एक पति अपनी पत्नी की बीमार होने पर उसके पास बैठा हो । उसने अपने पापा को अपनी मम्मी के लिए ऐसा करते हुए कभी नहीं देखा था । उसे यह देखकर आश्चर्य होता है ।
कंचन जब तक पूरी तरह ठीक नहीं हो गई तब तक विवेक ने उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरतों का ध्यान रखा था और उसे खुद पूरा किया था । कंचन को पूरी तरह ठीक होने में एक सप्ताह लग गया था और इन एक सप्ताह में विवेक ने कंचन को अपने प्यार का एहसास करा दिया था । कंचन के दिल में भी विवेक के लिए प्यार का एहसास हो चुका था ।
कंचन ने देखा कि विवेक में वह सारी बातें थीं जो उसने अपने घर में अपने पापा की तरफ से मम्मी के लिए कभी नहीं देखी थी । विवेक ने आज तक कंचन को कभी भी किसी बात के लिए जोर - जबरदस्ती नहीं की थी और यही बात कंचन के दिल को छू गई थी । अब कंचन विवेक को प्यार करने लगी थी और एक दिन ऐसा भी आया जब दो प्यार करने वालें एक हो गए ।
💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
" गुॅंजन कमल " 💓💞💗

0 टिप्पणियाँ