अक्सर पूछते हैं, लोग मुझ से,
कि, कितनी उम्र है आपकी!
और क्या है? आपकी,
खूबसूरती का राज!
इन चंचल मुस्कान का कारण!
आप स्वत्रंत हैं, श्वछंद हैं,
आपके घर के लोग,
कुछ नहीं कहते आपसे!
अब क्या कहूँ? ऐसे लोगों को,
अरे! मैं माँ हूँ, पत्नी हूँ!
बहन हूँ, बेटी हूँ!
तो क्या? सिमट जाऊँ खुद में!
मैं सभी किरदार में, खड़ी उतरती हूँ,
जब इतने सारे किरदार,
बखूबी निभा सकती मैं!
तो "रसोई "से निकलकर, आगे क्यों नहीं!
इंसानों की सोच! औरत की दुनियाँ सिर्फ,
" रसोई " तक ही निहित!
नहीं! बिल्कुल नहीं!
जिंदादिल हूँ, मन भर भर कर जीती हूँ!
मन में भर कर नहीं!
मैं अपनी " मर्यादा " जानती हूँ!
मैं विचारों से स्वत्रंत हूँ,
जनाब!!!!!
अपने संस्कारों से नहीं!
************************************
श्वेता कर्ण!
***************

5 टिप्पणियाँ