सरहदों पर कंटीली बाड़ से निकलकर
दुश्मन की गोलियों की बौछार से निकलकर
सैनिक का संदेश पहुंचाने
मिलों लम्बा सफर तय कर सरहदों से
गांव की सरहद में जब आता होगा
सैनिक का ख़त फूला नहीं समाता होगा
मन ही मन मुस्कुराता होगा।
दरवाजे पर देकर दस्तक कहता होगा
सरहद से मैं आया हूं प्यार का पैगाम लाया हूं
मां पिता को सामने पाकर नतमस्तक हो जाता होगा
धन्य है मां भारती पाकर तेरा लाल कहकर
शाष्टांग दण्डवत प्रणाम कर चरणों को वह चूमता होगा
सैनिक का ख़त फूला नहीं समाता होगा
मन ही मन मुस्कुराता होगा।।
सरहद से रवानगी से पहले
सैनिक के दिल की कलम से
कोरे खत पर जब प्रेयसी का
सूनहरे अक्षरों से नाम लिखा जाता होगा
सैनिक का ख़त फूला नहीं समाता होगा
मन ही मन मुस्कुराता होगा।।
प्रेयसी के कोमल नाजुक हाथों से
खुलती होगी परत दर परत सिलवटें खत की
पाकर स्पर्श प्रेम का
सैनिक का ख़त फूला नहीं समाता होगा
मन ही मन मुस्कुराता होगा।।
सुनाकर प्रियतम का हाल ए दिल
प्रेयसी के मुलायम सुर्ख लबों का
प्रेम चुंबन पाकर लबों पर
सैनिक का ख़त फूला नहीं समाता होगा
मन ही मन मुस्कुराता होगा।।
दिखाकर अक्श प्रियतम का स्व हृदय में
ठंडी श्वास भरकर सीने में
प्रेयसी के सीने से लग जाता होगा
सैनिक का ख़त फूला नहीं समाता होगा
मन ही मन मुस्कुराता होगा।।
सैनिक की हृदय पीड़ से निकला एक आंसू
प्रेयसी के कजरारे नयनों से होकर
जब खत के सीने से टकराता होगा
पीकर आंसू प्रेम का खत स्व हृदय बीच छुपाता होगा
मुस्कुराना छोड़
सैनिक का ख़त दर्द में आहें भरता होगा
तकिए के नीचे छुपाकर चेहरा आंसू अनगिनत बहाता होगा।
आंसू अनगिनत बहाता होगा।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏💐💐

0 टिप्पणियाँ