बदल रही है मां पहले लगाती थी बिंदी माथे पर
आज कोमपैक्ट ,आईलाइनर मसकारा और लिपस्टिक की है भरमार,
पर बदला नहीं है जो था हमेशा वैसा ही है आज भी मां का प्यार।।
बदल रही है वो मां साड़ी वाली,
सुनहरा पल्लू गीला मुख पौंछे बारी बारी
घर के सफाई का साधन थी जो साड़ी
अब टीशर्ट पजामे में जींस भी समाये,
मुख पोछन के खातिर अब नैपकिन रखना पड़ता है भाई,
लेकिन बदला नहीं तो बस वैसा ही है मां का प्यार।।
बदल रही है मां पहले केवल वही बनाती जो सब घर वालों को खाने में भाये,
ग़र बालसभा नखरा दिखाए तो तुरंत एक दो वहीं ठोके जाए,
पर माँ ही जीते जिद बच्चों की मज़ाल जो चल पाए ।।
अब माँ सब कुछ बच्चों की मर्जी का भी बनाती है,
यूट्यूब से नई रेसिपी रोजाना आजमाती है ,
पर "एक्सपेक्टेशन" लेवल हाई होता है ,
बदले में "लव यू थैंक यू मॉम" भी सुनना चाहती है ,
क्या बदलना वो न कभी चाहती थी?
हां बहुत वो करना कुछ चाहती थी,
पिता का दायां हाथ बनजाती थी,
बदली वह भी थी एक सहमी सी लड़की दूजे के घर आकर,
खुश तो थी नई दुनियां पाकर
लेकिन
तोड़े भी छुपे मन के सपने रखे जो थे सजाकर,
तुझे भी आंगन में भाता था न सब के संग बतियाना ,
घुघंटे से निकलकर बारिश में उछल उछलकर छपछपाना ,
भूख लगने पर सबसे पहले भरपेट खाना खा जाना, मर्यादा की ओट में छिप गए थे जो शौक तेरे वो सारे,
तोड़ो झिझक इस उम्र में वही झिझक तुमसे बस हारे।।
हम बच्चों को भी सुकून देता है तेरा मॉडर्न हो कर जी जाना
जैसे नोकिया पेज़र से स्मार्टफोन पर तेरा यूट्यूब और व्हाट्सएप चलाना, जीवन तो है ही बदलने का बस नाम ,
अब तो जी कर देख खुद अपने ही बस ख़ातिर
हो जाएंगे सब होते थे जैसे होने होंगे बाकी काम ,
सीमाओं में ना बंधना मां, जैसा भी मनचाहे तेरा
वैसा ही आकार तेरा गढ़ना मां,
रंग चाहे तेरा सुनहरा हो बालों का ,
ढंग तेरा रखना वही जो तुझको भाये,
ख्याल तेरे आजाद रहे ,
तेरा वैभव सदा ही अमर रहे
हम दिन चार रहे ना रहे,
तू जीना अपने सपनों को
तू सपनो से अपने आबाद रहे,
बेशक़ प्यार से निभाना माँ रिश्ताबंद फर्ज तेरे सारे ,
घर में सम्मान से कुछ भी तू करने को बस आजाद रहे,
बदलना मां जैसी तू बनना चाहे
बदलावों के पैमानों पर मां
प्यार तेरा कम न होने पाए, बहुत सींचे थे जो सपने
अब करने की है उनको तेरी बारी
संग सपनों के जीकर भी
लगती रहेगी हमेशा ईतनी ही प्यारी।।
भारती प्रवीण..✍️💕

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