शहर गाँव का तेरे नाम न  जानू तेरा,
बस नाम से नाम तेरे एक भेजा सन्देशा है ।
कभी फुर्सत हो तो कर लेना,
मेरी दिल की गलियों में पगफेरे,
जैसे बन गयी मैं तेरी जोगन , 
बस एक दिन को तुम बन जाना जोगी मेरे।
पल पल राह निहारेंगी अखियां,
अब जाने कब होंगी जाने बाले तुझसे बतियाँ,
शायद तुम न आओगे, अपने देश  मे जाकर,
पर बैरी दिल हट कर बैठा,
बस करके यही भरोसा ,
आओगे तुम आओगे, उसको  लगा यही अन्देशा है।
तुम आए तो , आया जीवन,
पाके तुमको , संचित हुआ विरही मन,
सौ- सौ  बार तृप्ति पा गया तन मन,
जो फेरी उसने प्रेम से भीगी  चितवन,
मत पूछो  मैं  तो हार गयी क्या  क्या,
जब उसने हाथ थामकर पूछा,
मिजाज आपका कैसा है।
उसके आने से पहले ही मस्त हवाएं आयीं,
  पतझङ के मौसम में भी कितनी  महकी फिजाएं आयीं,
उसके आने से आये  गुलाबी मौसम,
खिल गया मुरझाया उपवन,
न पूछो उसके नयनों का अदभुत वो मौन निमंत्रण कैसा है।



अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।