पहला प्यार जैसे,सावन की फुहार......😊
जो धीरे-धीरे मन को भींगा के रोम- रोम
आनंदित करता है................☺
ठंडी हवा का झोंका, जो दिल में मचलते
अरमानों को आसमान में उड़ा ले जाता है......😊
पहला प्यार, शर्म बेसुमार........☺
होंठ खुल ना पाये,आँखों से इकरार......... 😊
धड़कन बोलना चाहे,दिल रोके बार-बार......☺
नज़रें शर्म से बोझल.............😊
पर दिल ना चाहे,वो आँखों से हो ओझल..........☺
तन का नहीं,मन का जब हो श्रृंगार.........😊
यही होता है, पहला प्यार..................☺
ऋचा कर्ण✍✍

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