'आदि शक्ति' मानो या ना मानो .......पर मुट्ठी भर अपनापन और सहानुभूति दे दो
मुझे पूरा घर न दो .......बस एक कोना दे दो जहाँ मैं अपने आप को सहेज लूं समेट लूं । मुझे संवेदना मत दो पर गहरी वेदना तो ना दो ।
मुझे अधिकार दो या न दो ......पर कर्तव्य को चुन के उसे पूरा कर सकूं इतनी आज़ादी तो दे दो ।
मुझसे प्यार करो या ना करो......पर मैं खुद को प्यार कर सकूं इतना अधिकार तो दे दो ।
मुझे सम्मान दो या न दो.........पर खुद का सम्मान कर सकूं यह सक्षमता दे दो ।
मुझे स्वतंत्रता भले ही न दो....पर वर्जनाओं से मुक्ति दे दो।
मैने तोड़। है जंजीरो को .......माँगा है अपने अधिकारों को....तलाशा है अपना आसमान........चुना है मन का रास्ता .......पथ पर बिछे ये संघर्ष के काँटे तब कहीं पा सकी अपना अस्तित्व .......पहचान सकी अंदर छिपी ताकत......ढूंढ सकी स्त्री शक्ति का महत्व......
वक़्त बदला है वक़्त का मिजाज भी.......जागी है हिम्मत और जागा है विश्वास भी.........😊😊😊😊😊
आज नहीं मैं अबला आज नहीं बेचारी........☺☺
बदल चुकी हूँ खुद को ''शक्ति'' है पहचान हमारी.......
👍👍😊😊💐💐💐💐☺
ऋचा कर्ण😊✍✍

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