अब तो दिल भर गया,
देखकर ख़ौफ़नाक मन्जर डर गया,
अब और नही सहा जाता ,
घुटता है दम, बन्द नही रहा जाता।

कैसा समय आया है,
मन कितना घबराया है,
हर तरफ पसरा सन्नाटा,
अब यह सूनापन और नही भाता।

मोबाइल टीवी भी बेकार लगे,
लगता है बस सबका साथ मिले,
  भर आतीं हैं पलकें,जब याद,
बिताया सबके साथ का वो ,दौर आता।

मन करता कहीं दूर चले जाएं,
पर समस्त संसार है इससे त्रस्त,
कोई बचा नही, बच्चा ,बूढ़ा, 
साधू सन्यासी, गृहस्थ सभी को यह  डर सताता ।

चल रे साथी कहीं दूर ले चल,
जहां मिल जाएं वो खोए हुए पल,
फिर से चहक उठे गली मोहल्ले,
लौटे वो दिन जिनसे ह्रदय सृजित हो जाता।

अंजू दीक्षित,
बदायूँ, उत्तर प्रदेश।