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 हिंदू ,मुस्लिम, सीख, हो या फिर हो ईसाई  
जीवन सबका एक है सुन लो ओ धर्म काटने वाले कसाई
 तुम्हारा जीवन भी तो उस परमात्मा ने ही बनाई 
तो फिर क्यों इस धारा पर धर्म के नाम पर आतंक हो मचाई।

 जीवन तो अनमोल है नहीं है इसकी कोई पढ़ाई 
सब धर्मों का जीवन एक ही ईश्वर ने है बनाई 
यह सुंदर जीवन ईश्वर से भेंट स्वरूप है पाई 
तो बताओ कहां से अपने अंदर यह क्लेश की भावना लाई।

 एक ही कारखाना एक ही कारीगर ने सबका जीवन बनाई 
हर कोई अपने जननी के गर्व से अवतरित होकर यह सुंदर दुनिया को है पाई
 तो बताओ हे तुच्छ मानव ! कहां से भिन्न-भिन्न धर्म है आई

जन्म लिया जो भी इस धरती पर जीवन जीना है सबका अधिकार 
कोई समझो ना किसी को इस धरती पर बेकार
 क्योंकि जिस दाता ने दिया तुमको इस धरा पर जीवन, उसी ने अपने हाथों से दिया सबको रंग आकार

जो जन्म लिया इस क्षितिज पर है अधिकार अपना करना सपना साकार 
जीवन है अनमोल इसमें धर्म नाम का विष  घोलकर मत कर इसको बेकार ।

  
  🙏सुशील चौधरी🙏