पूस की रात का अंधेरा गहराता जा रहा था।कुतों के भौंकने की आवाज़ आ रही थी।रामू खेत की पगडंडी से घर की और तेज़ी से बढ़ता जा रहा था।
रात के वक्त कोई साधन नहीं मिला ,
सुबह गन्ना, " चीनी मिल" 'में पहुंचाना था ,पर्ची आयी थी उसके नाम की,इसी कारण उसे बहन के रोकने पर भी आना पड़ा था।
रामू अपने भांजे के मुंडन में गया था,आयोजन खत्म होते रात हो गई थी।घर पहुंचने वाला ही था कि
तभी अचानक एक स्त्री ठंड से सिकुड़ी जोर जोर से रोते दिखाई पड़ी।रामू के जेहन में बहुत सी बात आने लगी _ कौन है ये युवती, यहां क्यों बैठी है?
नजदीक आकर उसने पूछा_ आप कौन हैं,और रो क्यों रही हैं?
युवती ने सर उठाया,जैसी अंधेरी रात में बिजली कौंधी हो, बला की खूबसूरत ,दूध सी उजली ,देख कर कुछ देर रामू के मुंह से आवाज़ ही नहीं निकली।
उस युवती ने कहा ,उसके पति ने उसे घर से निकाल दिया ,किसी और स्त्री को अपनी पत्नी बना लाया,मेरा कोई नहीं इस दुनिया में,भटकते -भटकते में यहां आ गई, कहां जाऊं ..?..और फिर जोर जोर से रोने लगी।
रामू तो उसके सम्मोहन में इस कदर फंस चुका था, कि बिना सोचे समझे, उसने कहा कि मेरे घर चलो।और उसको लेकर घर पहुंचा।
रामू को किसी युवती के साथ आया देख मां भौंचक्की रह गई,रामू ने बताया मां अब से यहीं रहेगी ।हड़बड़ी में उसने उसका नाम नहीं पूछा था,"तुम्हारा नाम क्या है"?_ रामू ने पूछा था,उस युवती से।
"जी ,सुगंधा।
मां गौर कर रही थी कि रामू कुछ ज्यादा ही ख्याल रख रहा था।
रामू की उम्र शादी की हो चुकी थी,लेकिन बहुत आमदनी नहीं थी, गन्ना वह बंटाई पर लगाता था,एक दो बीघा ,मालिक के खेत का। बहुत कम आय थी ।
सुगंधा ने घर में आते ही सबकुछ संभाल लिया।रामू की मां को कुछ करने नहीं देती थी।
उसके व्यवहार से सब बहुत खुश थे।वह रामू को सलाह देती थी कि कौन सी फसल लगानी चाहिए ,जिससे आमदनी हो।
सुगंधा की सलाह से रामू ने औषधीय पौधे जैसे सर्पगंधा,ब्राह्मी,अश्वगंधा लगवाए।
खूब आमदनी हुई,ड्रग बनाने वाली कंपनियां उसे खरीद लेती ।रामू दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा था।
रामू और सुगंधा बहुत पास आ चुके थे,वे पति पत्नी की तरह ही रह रहे थे।
रामू की मां ने इस संबंध को शादी का नाम देने को सोची।
यही सोच वह पंडित जी के पास गई।
लेकिन एक बात उसे रोज़ खटकती थी ,की सुगंधा रात के करीब 1 बजे निकल कर कहीं जाती थी।उसने पूछा था,तो सुगंधा कहती " माता जी ,मुझे नींद नहीं आ रही थी ,इसलिए बाहर खुली हवा में चली जाती हूं।
रामू की मां पंडित जी के पास गई,दोनों की शादी की तिथि निकलवाने,पंडित जी मिले नहीं कहलवा दिया पंडिताइन से की रामू के घर भेज देना,जब आएं।
पंडित जी जब आए तो उन्हें ,घर बहुत अजीब लगा ,नकारात्मक ऊर्जा के कारण उनका दम घुटने लगा।
इतने में सुगंघा आई,पंडित जी ने उसे देखा और रामू की मां को अपने घर आने को कहा।
घर जाते समय पंडित जी काफी डरे थे,जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो।
रामू की मां अगले दिन आयी ,पंडित जी ने बताया वो तुम्हारी बहू नहीं हो सकती ,क्योंकि वो कर्ण पिशाचिनी है,।
रामू की मां का मुंह खुला का खुला रह गया।
अब ............
क्या होगा????
रामू भी आजकल बहुत कमजोर दिख रहा था।
मां ने उपाय पूछा _" कैसे मुक्ति मिलेगी मेरे रामू को"।
पंडित जी ने उपाय बताया, गांव से दूर पीपल के वृक्ष के नीचे एक सिद्ध संत रहते हैं,वहीं कुछ मदद कर सकते हैं।
"बाबा मेरा एक ही पुत्र है ,हमे मुक्ति दिला दो"
_ यह कह रामू की मां बाबा के चरणों में गिर कर गिड़गिड़ाने लगी।
बाबा ने ढांढस बंधाया और घर आने का वादा किया।
घर पहुंचते पिशचिनी ने रामू की मां ,को अपना असली रूप दिखाया,"बुढ़िया तू मुझे भगाएगी " अब तू नहीं बचेगी।
और उसने अपनी उंगली घुमाई ,रामू की मां गोल गोल घूमने लगी, उसे चक्कर आने लगे।
बचाओ बचाओ, की चीख पुकार से वातावरण गूंज उठा।
लेकिन पिशाचिनी अट्टहास करती हुई,कह रही थी,"तेरे बेटे को मै लेकर जाऊंगी।
वो मेरा है।"
तभी बाबा जी का प्रवेश हुआ।इतनी शांति और ओज था उनके चेहरे पर कि पिशाचिनी डर गई,।
लेकिन साहस करके उनसे अनुनय विनय करने लगी ,कहने लगी " मैंने इनका कोई अनिष्ट नहीं किया ," बाबा।
लोग मुझे सिद्ध कर पाते हैं अपने कार्यसिद्धि के लिए ,लेकिन मै रामू से आसक्त हो आयी ,मुझे यही रहने दो।
लेकिन बाबा ने कहा ,तुम जाओ जहां तुम्हारी जरूरत हो और इन्हे तुम्हारी कोई जरूरत नहीं।
और पवित्र जल छिड़क दिया ,जिससे उसका शरीर जलने लगा ,और उसे जाना पड़ा।
इस तरह रामू और उसकी मां को एक पिशाचिनी से मुक्ति मिली।
स्वरचित_संगीता सिंह

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