"तुम्हीं मीत, मनमीत तुम्हीं हो,
मेरे जीवन गीत तुम्हीं हो।
मैं ही हूं रुक्मिणी मैं ही मीरा
और कान्हा सी प्रीत तुम्ही हो।।
तुम संग हंसना तुम संग रोना
तुम्हीं संग बीते जीवन अपना,
तुम्हीं संग झगड़ा,प्रीत तुम्हीं संग,
तुम्हीं बने हो मेरा सपना।।
संग बहूं बहूं निर्मल धारा,
तुम संग सागर में, मैं मिल जाऊं।
तुम हो तो उन्मुक्त पवन संग
आसमान में, मैं उड़ जाऊं।।
तुम जो रुठो तुम्हें मनाऊं
चरणों में भी मैं बिछ जाऊं।
छोड़ गए तो तुम्हीं बताओ
कैसे जीवन आज बिताऊं।।"
अम्बिका झा ✍️

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