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मेरे काव्य के भंजन से,
तू शब्दों का आपा रोल ले....
जो नाम मिला तुम्हें "उपनाम" का
मन में जाल का झोल दे....
मेरे काव्य के......
जग हंसाई से उठे कलंक,
तो डम-डम डमरू बोल दे....
ऐ लोग मुझे ना कर बदनाम अब,
तू अपनी वाणी तौल ले....
मेरे काव्य के......
ना बद्नाम कर तू "उपनाम" को,
सबको मुझसे 'आह' लगे....
रौनक से झूमते आशियां में,
यूँ 'विष' ना अपना घोल ले....
मेरे काव्य के......
लेखक:- विकास कुमार लाभ
मधुबनी(बिहार)

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