कमलनाथ जी आज बहुत ही व्यस्त थे,सबको काम बता रहे थे कूछ भी गड़बड़ नही होनी चाहिए सब जल्दी जल्दी करो ,तभी फुलो से भरी गाड़ी आती हैं कमलनाथ जी वहाँ पहुछ जाते है।
मीठाईयो की खुशबु,फूलों की भीनी खुशबूओ से पूरी गली महक उठी है ,सब अपने अपने काम में लगे हुए हैं,
बच्चे,औरते हसी ठीठोली कर रहे है, ढोलक बज रहे है,
चारों तरफ खुशनुमा माहौल है।
कमलकांत जी का घर मेहमानों से खचाखच भरा हुआ है और हो भी क्यों न उनकी बड़ी बेटी उमा की शादी जो है ।
........उमा इतना रोते नही बेटा ,तेरी तबीयत खराब हो जाएगी ,सूचना जी उमा को समझा रही थी,कमलकांत जी की पत्नी है सूचना जी ।
सब तैयारीया हो गई ,उमा भी दुल्हन बन गयी,बरात आ गई ,पूरी विधि विधानो से शादी भी होने लगी ,पर दूल्हे के पिताजी बीच मे बोल पडे, कमलकांत जी मैनें जो जो कहा था वो सब तो आप अपनी बेटी को दे रहे है न,
कमलकांत जी थोड़ा सकुचाते हुए बोले समधि जी आप शादी कर लो मै कूछ दिनो मे आपको और पैसे दे दूंगा अभी सिर्फ 7लाख ही हो पाया है ।पर मै दे दूंगा ,
.................बन्द करो ये शादी नही होगी ,सब लोग सुन के ह्क्के ब्क्के रह गये ।।।।।।।।।।।
ये झूठा इन्सान अपनी बात से मुकर गया ,चलो राहुल उठो.........................।
कमलकांत जी ने अपनी पगड़ी उतार के उस लोभी के कदमों मे रख दिया ,और बोले ये शादी मत तोड़ो मेरी बेटी का क्या होगा ,पर उस अदमी का दिल नही पिघला।
राहुल (दूल्हे का नाम ) तू अपने पापा को क्यों नहीं समझा रहा ये तो गलत है ,और दहेज मंगाना तो कानून अपराध है तू भी जानता है तो चुप क्यों है , तू पढ़ा लिखा हो कर भी तू कूछ क्यों नहीं बोल रहा है यार ।
ये सब राहुल का दोस्त उसे समझा रहा था ,जिसका नाम शिव है।
देख यार पापा जो कर रहे है वो ठीक कर रहे है सब मागते है और देते है,मैने अपनी बहनों को भी तो दिया ही है। इसमे क्या गलत है ,और वो अपनी बेटी को ही तो देगे ना ।
शिव की सारी मेहनत बेकार गई राहुल नही माना ।।बारात भी गई ,बिना शादी किए ,बिना दुल्हन लिये ।।।।।।।।।।पर शिव नही गया उसने कहा शादी होगी आपकी बेटी आज ही इस घर से विदा होगी मै करुगा शादी ।सब को अच्छा लगा ।शिव ने उमा के पास जाकर उससे कहा क्या तुम करोगी मुझसे शादी मेरे पास बहुत पैसा तो नही है पर तुम खुश रहोगी ये मेरा वादा है ,उमा को वो एक सच्चा लगा उसने अपना हाथ आगे कर दिया ,कमलकान्त जी को थोड़ी हिम्मत मिली ।।।।
शादी हो गई ।
तभी एक बुजर्ग महिला ने कहा कि अब शादी सही इन्सान से हुई है ,पार्वती तो शिव की ही है तो हमारी उमा भी शिव के साथ ही जाएगी ,सबने शिव को मन से आशीर्वाद दिया ।
शिव ने कहा पापा जी मुझे ये सब नही चाहिए ,आप ये सब हमारी साली साहिबा के लिए रख दिजीये ,बस अपना प्यार और आशीर्वाद दिजीये ।
उमा आ गई अपने ससुराल,शिव ने अपनी माँ को बताया तो वह खुश हूई उसे अपने बेटे पर गर्व हुआ ।उमा की सास ने वो सारे रस्म किए जो की एक बहू के आने के बाद होता है अब घुघट उठाने की बारी ,घुघट जब उठा तो सब देखते ही रह गए ,मानो कोई अप्सरा हो इतनी सुन्दर मेरी बहू । अब तो रात मे लाइट की भी जरुरत नहीं ,शिव ने जैसे ही ये बोला सब हसने लगे ।
उमा बहुत ही खूश है ,अपने घर मे आके और उमा से भी सब खुश है।
2साल बाद एक बेटे की माँ बन जाती है उमा ।
यूही हसी खुशी से दिन कट रहे थे , एक दिन उमा का मन बहुत ही घबरा रहा था तभी फोन बजता है और उसे अस्पताल बुलाया जाता है, वो जल्दी से पहुच जाती है ,और वहा देखती है की उसका शिव अस्पताल मे है ,डॉक्टरों से उसे पता चला कि शिव के दोनो पैर कट चुके है ।
वो अपने आसूँ पोछ के शिव के पास जाती है और पूछती है की कैसे हो गया ,शिव बोलता है की जब सुबह निकला काम के लिये तो सामने एक बूढ़ा आदमी जा रहा था और उसको बचाने के चक्कर मे बाइक का ब्रेकफैल हो गया और मै गिर गया मेरे दोनो पैर बेकार हो गए अब मै कभी चल नही पाऊगा ।
इतना कह के शिव रोंने लगा बच्चो की तरह ,उमा ने उसे अपने सिने से लगा लिया और बोली आप के लिये मै हू आप और मै साथ साथ चलेगे मै आप को हर जगह ले के जाऊगी आप की उमा है आप चलेगे भी ,आज कल तो सब हो जाता है ये डॉक्टर आप के पैर को भी ठीक कर देगे ।
दोनो एक दूसरे को कस के पकड़कर अपने अपने मन के आसूँ को साफ़ कर ने लगे ।
और दुर कही गाना बज रहा था
................................
हसते हसते कट जाए रस्ते
जिन्दगी यूही चलती रहे .....................

0 टिप्पणियाँ