🌺🌻🌺🌻ॐ 🌻🌺🌻
आसमानी चादर ओढ़े अंबर की गलियां---
उन गलियों में टहल रहे हैं,राधा-कृष्ण कन्हैया
गरज-गरज कर बादल आए, मनमोहक संगीत सुनाएं,
मंत्र  मुग्ध मुस्कान लिए मनमोहक धुन बजाएं,
मुरली की धुन से बादल, गर्जन कर इतराते हैं---
मनमोहक ध्वनि से धरा का, मन हर पल हर्षाते हैं,
सतरंगी रंगों से  धरा का,अंग अंग खिल जाता है,
कर के साज श्रृंगार धरा का, ह्रदय झूम कर गाता है,
आएंगे मुरली वाले धुन मुरली की छोड़ेंगे,
गोपियों के संग कृष्ण कन्हैया, रास रचा कर खेलेंगे,
रंग में उनके रंग जाऊंगी, रंगरसिया मैं बन जाऊंगी,
धानी चुनर ओढ़ कर, मुरली की धुन पर---
झूम झूम कर  नाचूंगी मै गाउंगी ,
चहुं दिशा में फैली है कान्हा की छवियां---
आसमानी चादर ओढ़े अंबर की गलियां।


संगीता वर्मा✍✍