दो पल की तुझे फुरसत नहीं,
वो इंतजार में बैठा है,
चेहरे पे झुर्रियां लिए, 
वह बीमार बैठा है....

बचपन के सारे शौक और
तेरी जरुरतें पूरी करने को,
दौड़ धूप करता रहा,
आज थक हार बैठा है....

दो पल की तुझे फुरसत नहीं,
वो इंतजार में बैठा है....

पढ़-लिख के कामयाबी की
ऊंचाइयों को तू छू सके,
दिन रात था मेहनत किया,
अब बेरोजगार बैठा है....

दो पल की तुझे फुरसत नहीं,
वो इंतजार में बैठा है....

कई बातें अब याद नहीं रहती,
पर यादें कई रखी हैं संजोकर,
थोड़े-से सम्मान की चाह लिए,
बस वह खुद्दार बैठा है....

दो पल की तुझे फुरसत नहीं,
वो इंतजार में बैठा है....

सब मस्त हैं अपनी मस्ती में,
परवाह नही उसकी फिर भी,
गम की तेज धूप से बचाने,
बनके पेड़ छायादार बैठा है....

दो पल की तुझे फुरसत नहीं,
वो इंतजार में बैठा है....

उनका अकेलापन तो समझो,
कुछ वक्त साथ बिताओ जरा,
मन की बातें सांझा करने,
वह बेकरार बैठा है....

दो पल की तुझे फुरसत नहीं,
वो इंतजार में बैठा है....

            ✍️प्रीति ताम्रकार
                 जबलपुर