अरमान अधूरे रह गए खुशियां पड़ गयी फीकी,
बेटे के बदले घर में जब आयी इक नन्ही बेटी।
खुले आम घूमते है बेटे बेटी पर लगती पावंदी,
पड़ न जाये उस पर कहीं नजर समाज की गंदी।
अनुशासन और संस्कारों की निशानी है,
स्त्री तेरी यही कहानी है!!!

सदियों से आयी नारी के लिए पति प्रेम की परिभाषा है,
युग-युग से सहती आयी है वो अपमान की ये गाथा है।
सीता के जैसी देवी पर यों मिथ्या कलंक न लगा होता,
द्रोपदी जैसी नारी का यों वस्त्र हरण न हुआ होता।
प्यार और समर्पण की निशानी है।
स्त्री तेरी यही कहानी है!!!

माँ ही मन्दिर माँ ही मस्जिद माँ जग के हर इक कोने में,
इसकी ममता के किस्से हम सुनते है वेद पुराणों में।
जो पाल पोष कर बड़ा करे लोरी को गाती सुलाती है,
जीते जी जिसकी कदर न कि वो माँ पितृ पक्ष में पूजी जाती है।
ममता और त्याग की निशानी है।
स्त्री तेरी यही कहानी है!!!

शीला द्विवेदी "अक्षरा"