मै प्रितम को लेकर जल्द से जल्द घर पहुँचाना चाहती थी। जल्दी से दवा लेकर सड़क के किनारे आकर टैम्पो के मिलने का इंतजार करती हूँ। मै.बारबार बाबु को पुचकार रही थी। वो रो रोकर थककर चुप हो गया था। 
घर आकर उसे बिस्तर पर सुलाती हूँ। बुखार नापकर देखा तो अब भी बदन गर्म था ठंड इतनी ज्यादा थी कि वो ठंड से काँप रहा था ,सर्दी से सुड़सुड़ा रहा था , साँसे बहुत आवाज कर रही थी ,नींद मे भी अकबका रहा था।
मै प्रितम को गोदी मे लिए हुए ही जाकर अंगीठी जलाकर लेकर आती हूँ  , प्रितम को अपनी गोदी मे लेटाकर ,हाथ मे सरसों तेल लगाकर ताप दिखाकर उसकी छाती की और पाँव के तलवे की सेंक करती हूँ। अब तक मे बुखार का तापमान हल्का हो चुका था। सेंकने से ठंड मे भी आराम आ गया था। उसे दूध पिलाकर रजाई उड़ाकर गोद मे ही सुलाए रखती हूँ।
घड़ी मे बारह बज चुके थे ,अभी तक घर कोई आया नहीं था। मम्मी जी के पास घर की चाभी थी इसलिए निश्चितं थी। मेरी भी आँखे नींद से झपकी जा रही थी , मै बेड का सहारा लेकर बैठ जाती हूँ ,आँख लगी ही थी मेरी कि प्रितम अचानक से  नींद मे ही हड़हड़ा कर उल्टी करने लग जाता है और जोर जोर से रोने लगता है जिससे उसका गला अवरुद्ध जाता है। मै जल्दी से प्रितम को गोदी से उठाकर कँधे मे लेकर उसके पीठ को सहलाने लगी पूरा बदन पसीना से तरबतर हो गया ,उल्टी से पूरा गंदा हो गया था , तब तक प्रेम जी आ गए उनको देखते ही मेरे आँखो से आँसू निकल गए। उनको समझते देर ना लगी , कमरे मे घुसते ही वो भागकर मेरे पास आए , रिपोर्ट को साईड टेबल पर रखा।
मैने उनको प्रितम को गोद मे दिया , गर्म पानी लाकर उनकी सहायता से बाबू को साफ करके कपड़े ,स्वेटर टोपी ,मोजा पहनाए ,प्रेम जी प्रितम को कँधे पर लिए हुए उसकी पीठ को पपोलते हुए घर मे चहलकदमी करते हुए लोरी सुनाने लगे जिसे सुनकर वो धीरे धीरे चुप होने लगा। लेकिन साँसो की गड़गड़ाहट अब भी बरकरार थी। मै तबतक फटाफट बिस्तर की साफ सफाई करके, अपने कपड़े चैंज कर लेती हूँ। 
इन्होंने मम्मी जी को फोन करके ऊपर आने को कहा
बताया कि बाबू की तबियत ठीक नही है।
मम्मी जी भी हड़बड़ा कर आकर पूछती है मुझसे, मैनै उन्हें सारी बात बताई उनके जाने के बाद जो जो हुआ।
उन्हें बहुत अफसोस हुआ कि वो बेकार ही गई  , मुझे और बाबू को घर मे अकेला छोड़कर। अगर घर मे मेरे पास साथ मे कोई रहता तो मुझे परेशानी नही होती।
बाबू प्रेम जी के कँधे पर सो गया था हौले से उन्होंने जैसे 
प्रितम को गोद से बिस्तर पे सुलाया फिर से वो उठकर रोने लगा , कुछ तो कड़कड़ाती ठंड की रात दूजा बाबू की तबियत खराब। मम्मी जी ने मुझसे कहा "तुम आराम कर लो थोड़ी देर मै रखती हूँ " 
मैंने मम्मी जी से कहा "मुझे नींद तो आएगी नहीं ऐसा करिऐ आप सो जाईए आप भी थक गई होगी।"
लेकिन हम मे से किसी का मन नही माना , हम सारी रात जागते रहे प्रितम की देखभाल करते रहे। रात भर बाबू भी बैचन रहा।
सुबह होते ही मैने देखा मम्मी जी ,प्रेम जी ,प्रितम तीनो ही सो रहे थे। प्रितम उठ नहीं जाए ,इसलिए हौले से मै  से उठती हूँ नहा धोकर तैयार हो जाती हूँ ,नीचे जाकर भगवान की पूजा अर्चना करके सबके लिए 
नाश्ता बनाने की तैयारी करती हूँ।  एकतरफ अपने लिए चाय चढा देती हूँ। चाय छानकर ,मै चाय पीती हूँ,
फिर सबके लिए रोटी सब्जी बनाकर रख देती हूँ।
फिर ऊपर आकर देखती हूँ अभी भी सभी सो रहे थे।
प्रितम को चैन से सोते हुए देख सूकून मिला।
छत मे जाकर कबूतरों को दाना देकर ,पौधौ मे पानी डालती हूँ। फिर मै नीचे जाकर घर की साफ सफाई करने लग जाती हूँ। पूरे घर की साफ सफाई का काम खत्म ही की थी , तभी  मम्मी जी उठकर नीचे आ गई। मुझे बोली थक गई होगी , तुम भी नाश्ता करके थोडे़ देर तुम भी सो जाओ ,जब सब आँएगे तो मै  सबको नाश्ता दे दूँगी। कल शाम से मैनै भी कुछ खाया नहीं था मुझे भी बहुत भूख लगी हुई थी मै किचन मे जाकर अपने लिए नाश्ता प्लेट मे 
डालकर खाने बैठ जाती हूँ। जल्दी जल्दी खाकर मै प्रेम जी के लिए चाय बनाकर ले जाती हूँ।

ऊपर जाकर देखती हूँ बाबू भी उठकर रो रहा था।
मैंने प्रेम जी को उठा कर चाय दिया बाबू को गोदी मे लिया और उन्हें रेडी होकर रिपोर्ट लेकर डाक्टर के यहाँ जाने को कहा। 
बाबू टायलेट करके अपने कपड़ों को पूरी तरह से भींगाकर रखा था। मैंने उसके कपड़े चैंज करके उसे दूध पिलाकर दवाईयाँ दी। तबियत खराब होने की वजह से चेहरा एकदम सुस्त हो रखा था। मै प्रितम के मन को खुश करने के लिए उसके साथ साड़ी के पल्ले से आँख मिचौली खेली ।थोड़ा सा हँसता फिर री ...री...करके रोने.लगता , देखकर माया भी लग रही थी। उसके बिमार होने से सभी घर मे बहुत चिंतित थे।
प्रेम जी तैयार होकर नाश्ता करके ऊपर रिपोर्ट लेने आते है , मुझे और बाबू को भी साथ चलने को कहते है। मै बाबू को शाल मे अच्छे से लपेटकर अपने सीने से लगाकर उनके संग डाक्टर के पास  जाती हूँ।

डाक्टर "अब तबियत कैसी है बच्चे की??"
मै "रात से कम ज्यादा करके बुखार चढ ही रहा है"
डाक्टर साहब प्रेम जी से रिपोर्ट लेकर देखते है। 
रिपोर्ट देखने के बाद , डाक्टर कहते है आखिर मेरा शक सही निकला।
मैने और प्रेम जी ने एक साथ कहा "कैसा शक??"
डाक्टर मेरी बात आप दोनो ध्यान से सुनिऐगा। किसी किसी बच्चे को जन्म से दिल मे छेद होता है ,मेरे हिसाब से आपके बच्चे को भी दिल मे भी जन्म से ही छेद है ,जो अब बढ गया है। इसका आपरेशन करना होगा । ऐसे बच्चों को 
सर्दी की शिकायत रहती है, निमोनिया भी हो जाता है।
जिस तरह से इसे इतनी तेज बुखार आ रहा है साँस लेने मे तकलीफ हो रही है ,होंठ और नाखून भी नीले हो रखे है। इसके छाती मे इंफेक्शन हो गई है । आपको इसे हास्पिटल मे एडमिट.करना होगा। पहले निमोनिया इलाज करेंगे फिर इसकी कैसी हालत रहती है उसके हिसाब से आपरेशन करेंगे।
मै और प्रेम जी सुनकर अचंभित हो जाते है। इतनी नन्ही सी जान को इतनी बड़ी तकलीफ़। मुझे तो कुछ समझ मे ही नहीं आ रहा था मेरे  तो सुनकर हाथ पाँव ठंडे हो रहे थे।
प्रेम जी डाक्टर से सारी बाते समझ रहे थे। मै बार बार 
प्रितम को अपने हृदय से चिपकाकर उसके चेहरे को एकटक ताक रही थी ,उसके ललाट को चूम रही थी।
डाक्टर भी शायद मेरी घबराहट को समझ रहे थे।
उन्होंने मुझसे कहा देखिये घबराहट होना लाजमी है क्योंकि आप एक माँ है। लेकिन नाजुक वक्त है आपको हिम्मत से काम लेना होगा। बच्चे के साथ आपको हास्पिटल मे रहना होगा , चार पाँच  महीने के बच्चे को अपनी माँ का ही दूध मिलना चाहिए।
प्रेम जी मम्मी जी को फोन करके बताते है प्रितम को डाक्टर हाँस्पिटल मे भर्ती करने कह रहे है। 
मै प्रितम को गोद मे लेकर हास्पिटल के एक बेंच मे  बैठ जाती हूँ तब तक मे प्रेम जी हास्पिटल मे एडमिट करने की सारी फार्मेलिटी पूरी करते है। 
एडमिट कराके प्रेम जी और मै वार्ड मे जाकर बाबू.को हास्पिटल के बेड पर सुलाते है मगर सुलाते ही वह रोने लगता है। मै उसे चुप कराकर सुलाती हूँ। उसे साँस लेने मे बहुत तकलीफ हो रही थी तो डाक्टर सिस्टर को आक्सीजन मास्क लगाने कहकर जाते है। उसकी ईलाज चालू हो जाता है। सिस्टर मेरे आँखो के सामने नन्हे से फूल से मेरे बच्चे को इंजेक्शन लगाती है। 
ईंजेक्शन लगाते ही दर्द से चीखकर वह रोने लगता है। उसे रोता देखकर मेरा सब्र का बान्ध टूट जाता है । मेरी आँखो से गंगा जमुना बहने लगती है। मै हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करने लगती हूँ कि वो मेरे बाबू को जल्दी से ठीक कर दो इसकी तकलीफ मुझसे देखी नहीं जा रही है।

भैया और प्रेम जी दोनो साथ मे हास्पिटल आते है।
भैया मेरे पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरते है और मुझसे कहते प्रितम जल्दी ही ठीक हो जाएगा तुम चिंता मत करना, रूपये पैसो को भी लेकर फिक्र मत करना ,तेरा भईया है सब संभाल लेगा। बोलते बोलते भैया की भी आँखे नम हो जाती है।
वो बाबू के करीब जाकर उसके सर को सहलाते है।
मै कमजोर न पड़ जाऊँ इसलिए वो अपनी भरी आँखे लेकर जल्दी से रुम से निकल जाते है।

बाबू बेसुध सो रहा था ,मै इसके बगल मे बैठी थी।
मेरी ममता मुझे कचोट रही थी ,मेरा बेटा काफी देर से भूखा है लेकिन मै कुछ कर भी नहीं सकती थी।

प्रेम जी आकर मुझसे चाय और खाने के लिए पूछते है। मैंने उनसे कहा आप खा लिजिये मुझे बिल्कुल भी भूख नहीं है।

उधर घर से मम्मी जी का भी बार बार फोन आ रहा था बाबू की तबियत जानने के लिए ,उन्होंने कहा मै आ जाती हूँ हास्पिटल तुम घर आकर आराम कर लो ,लेकिन मैनै मम्मी जी से कहा आप भले आ जाईए लेकिन मै बाबू को छोडकर कही नहीं जाने वाली।

इस तरह से हास्पिटल मे बैचेनी के तीन चार दिन निकल गए। चौथे दिन बाबू का मास्क हटाया गया। 
इतने दिनो बाद आज प्रितम मुझे देखकर मुस्कुराया।
आराम से दूध पिया , हाथ पाँव मारकर खेल रहा था।
मैंने भैया को ,घर मे मम्मी जी को ,माँ से सबसे फोन.मे बात की ,मै बहुत खुश थी। इनफैक्ट सभी बहुत खुश हुए खबर सुनकर सभी के बैचेन मन को राहत मिली।

मेरा बच्चा आज ठीक है मुझसे हुंकारा भरकर प्रितम बात कर रहा था। प्रेम जी मेरे लिए घर से खाना लेकर आए थे , मैंने भी बहुत दिनो बाद सुकून का खाना खाया था। एक माँ के लिए तो उसका बच्चा ही उसका जीवन होता है।

मुझे क्या पता था ये खुशी पल भर की थी , मेरे जीवन मे उथल पुथल मचाने के लिए तूफान आने वाला है, जो बच्चा मुझे एकदम ठीक लग रहा था अचानक से.अपनी माँ की गोद सुन्नी करके हमेशा के लिए सो जाएगा।


क्रमशः..........