नवचेतना जगे जागरूक संसार हो
हे मनुज ऐसा तुझमे रक्तसंचार हो
न झुके न तू, न रुके न तू
तुझमे गंगा सी अविरल तेज धार हो
हे मनुज ऐसा तुझमे रक्त संचार हो
जीवन मे कितनी भी परेशानियां आएं
उसका पूर्णतः डटकर सामना हो
झुके न सर तेरा कहीं शर्म से
बस ईश्वर से ऐसी कामना हो
हर उलझन से निकलने का
सुविचार हो
हे मनुज तुझमे ऐसा रक्तसंचार हो
निरोगी हो मन निरोगी हो काया
निरोगी रहे जगत और प्रभु की माया
स्वस्थ रहो खुद और स्वस्थ परिवार हो
हे मनुज तुझमे ऐसा रक्त संचार हो
सम्मान कर देश के सभी वीर जवान पर
खून खौल उठे देश की आन बान शान पर
जो सर उठे देश की अस्मिता पर
ऐसे पापियों का तुरन्त संहार हो
हे मनुज तुझमे ऐसा रक्त संचार हो
आओ हो सके तो मदद करें हम
खुद जागरूक हों और लोगों को जागरूक करें हम
रह न जाए कुछ कमी ऐसा सुविचार हो
हे मनुज तुझमे ऐसा रक्तसंचार हो
आपका मुकेश लखनवी

0 टिप्पणियाँ