मोरे अँगना में बसत नंदलाल है
माखन लिपटाय मुख घुटन पे चलतों
पांव में पैजनी घुघरू की ताल है
मेरे अँगना में खेलत नंदलाल है
पकड़े फिरे है अपनी ही छैया
ढूढ़त फिरत है यशोदा मैया
मेरे
किरणों की हीरो को पकड़े कन्हैया
ताली बजावे हँसे है उनकी मैया
संध्या पंवार राजस्थान

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