गतांक से आगे

अदिति डरते डरते आगे बढ़ी।
आवाज़ और साफ आ रही थी।अदिति आइने के सामने खड़ी होती है,तो उसमे एक रास्ता दिखता है।

वो आइने में घुस जाती है।और दूसरे लोक में पहुंच जाती है।
वहां उसे ,अनुज  एक खूबसूरत लड़की के साथ दिखता है।
वे दोनों खूब हंस हंस के बातें कर रहे थे।
वह सुन पा रही थी,अनुज ,उस लड़की को हंस हंस कर बता रहा था,मैं अदिति को रात की ड्यूटी का बहाना बना कर तुम्हारे साथ आया हूं।

वो तो बेचारी भोली है।सोच रही होगी कि मैं अपनी ड्यूटी कर रहा हूं।
फिर उस लड़की (,जिसका नाम सारिका अनुज पुकार रहा था) ने कहा ,कब पीछा छूटेगा तुम्हारी पत्नी से, मैं तो तंग आ गई हूं,इस लुकाछिपी के खेल से।

क्या कह रही हो,सारिका ,पड़ी रहने दो उसे भी एक कोने में ,उसे मेरे उपर बहुत विश्वास है,पति परमेश्वर मानती है मुझे ,और जोर से हंसता है ।

अदिति सन्न थी ,ये क्या खेल हो रहा,मेरे पीठ पीछे।

वह धीरे से वापस निकल आयी आइने से।
किसी तरह रात बीती।
सुबह अंकुर ड्यूटी से वापस आया,बहुत थका था। जल्दी मुंह ,हाथ धो अखबार ले सोफे पर पसर गया।
अदिति को उसका व्यवहार बेगाना सा लग रहा था।
अदिति ने पूछा ये सारिका कौन है? अंकुर हड़बड़ाया ,🙄😳उसने पूछा वो मेरी अधीनस्थ है,पर तुम्हे कैसे मालूम ??
नए ऑफिस के लोगों के बारे में तुम्हे कैसे पता?

अदिति कुछ बोली नहीं । अंकुर ने सन्नाटा तोड़ा ,उसने कहा ,अदिति आज घूमने जाओगी क्या?
अदिति ने कहा नहीं।
अंकुर की 15दिन ,दिन की और 15 दिन रात की ड्यूटी थी,इसलिए वह लंच कर दोपहर की नींद लेने लगा।
रात को अंकुर फिर ड्यूटी को तैयार हुआ।अदिति ने उसे विदा किया और थोड़ी देर किताब पढ़ सो गई।
फिर रात को अजीब फुसफुसाहट की आवाज़ सुन वह जागी।
आइना  उसे फिर से बुला रहा था , आओ आओ _अदिति ।
अदिति फिर आइने में घुस गई,आज  फिर उसने अंकुर और सारिका  को एक साथ देखा।अंकुर कह रहा था, कि पता नहीं आज अदिति कुछ  अजीब सा व्यवहार कर रही लगता है, हमारे बारे में उसे पता चल गया है।
सारिका ने आश्चर्य से पूछा _ ऐसा कैसे हो सकता है?
अंकुर ने कहा तुम ठीक कहती थी,अब हमें उसे रास्ते से हटाना पड़ेगा।
कल सुबह ही कुछ करूंगा मैं,....फिर वे हैवान कि तरह हंसने लगे।
अचानक आइने में से आवाज़ आने लगी ,मार डालो अंकुर को  मार डालो।
आज अदिति सुबह अंकुर के आने के बाद अजीब सी घूरती नजर आ रही थी।
अंकुर ने पूछा क्या हुआ,अदिति तुम इस तरह क्यों घूर रही हो।
अदिति पागल की तरह चिल्ला उठी।तुम मुझे बेवकूफ समझते हो,रात रात सारिका के साथ होते हो,और बताते हो कि तुम ड्यूटी कर रहे हो ,तुम मुझे रास्ते से हटाओगे , मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगी।उसने चाकू से अंकुर पर हमला कर दिया।
अंकुर सावधान ना होता, तो शायद आज कुछ बड़ी घटना घट जाती।
वह हैरान था।वह घर से निकल कर बाहर एक पार्क में चला गया।
वो परेशान था,अदिति के बारे में सोच सोच कर।
क्यों ऐसा व्यवहार किया अदिति ने?? एक बुजुर्ग बहुत देर से अंकुर को देख रहे थे,वे उसके पास आए।
उसके कंधे पर हाथ रखकर उससे पूछा क्या बात है????मै तुम्हारी कुछ मदद कर सकता हूं क्या?
तुम यहां नए आए हो क्या? पहले कभी देखा नहीं?
हां।। ,मेरी पत्नी की तबीयत, यहां दिन पर दिन खराब हो रही ,मै अब यहां से चला जाऊंगा।
ओह हो!!! ये बात है,क्या तुम लोग सोन गुफा के पास किसी बुढ़िया से मिले थे।
अंकुर ने कहा _ हां। उसने हमें आइना बेचा था।
ओह !! यही जड़  है तुम्हारी पत्नी की बीमारी की।दिन पर दिन उसकी तबीयत बिगड़ती जाएगी ,वो एक दिन तुम्हारी हत्या भी कर देगी। वो आइना यहां बहुतों की जान ले चुका है।
यह जरासंध का शापित आइना है,इसमें सामने वाले को  उसके प्रिय के  बारे में गलत बातें  दिखा कत्ल के लिए उकसाया जाता है।यह आइना शैतानी है ,इसे उस हत्या से और भी ताकत मिलती है।

अंकुर 😳 कुछ समझ नहीं पा रहा था,तो उपाय क्या है ,इससे बचने का।
तुम चुपचाप से उस आइने को एक सरोवर में डाल आओ।
बस यही रास्ता है।
अंकुर घर लौटा ,अदिति कमजोर हो,बिस्तर पर औंधे मुंह लेटी थी।
अंकुर ने चुपचाप से आइना  उतारा और उसे सरोवर में डाल आया।
दूसरे दिन उसने ऑफिस में अपने तबादले की अर्जी दे दी।
इन 20-25 दिनों में उसने और अदिति ने बहुत कुछ देखा और सहा।ऑफिस से उसका तबादला वापस से पटना कर दिया गया।
अब अदिति सामान्य हो चुकी थी।और दोनों एक खुशहाल जिंदगी जी रहे थे,लेकिन अदिति कभी कभी उस आइने को याद कर सिहर उठती थी ।