धरती माँ की रक्षा करने जाते है
सभी साथी लौट कर आ जाते है।
एक माँ के लाल कि खबर नहीं मिलती होगी
तो मन मे सवालों के ज्वार भाटे उठने लग जाते होंगे।
क्या दुश्मनों के हत्थे चढ़ गया या
फिर जंगली जानवरों के हाथ लग गया
यह सोचकर ही मन घबरा जाता होगा।
उनकी चिंता मे दिन रैन कटते होगे
ना चिट्ठी ना पत्री ना कोई संदेश
ना पाकर दिल कितना आशंकित हो जाता होगा।
रोजाना हेडक्वार्टर के चक्कर लगाते होगे
जवाब मे इंतजार पाते होगे।
इंतजार मे आँखे पथरा जाती होगी
नैनो के अश्क सूख जाते होगी।
खाने का निवाला हलक में ही अटक जाता होगा
क्या उसे खाना मिला होगा या भूखा बैठा होगा
यह सोच कर खाते-खाते हाथ रुक जाता होगा
भाई ,भाई की याद मे छुप छुप के रोता होगा
बहन भगवान से प्रार्थना करती है राखी की लाज रखना।
भाई की सही सलामत कि खबर कि दुआएँ माँगती होगी
इंतजार मे सबकी स्थिति एक ही होती होगी न।
मगर वीर जवान की ब्याहता कैसे अपने दिन रैन बिताती होगी।
शायद तस्वीरो से अपने मन की बाते किया करती होगी।
कब आओगे मेरे प्रियतम यह कहती होगी
उसके खाते मे आते है विरहे की राते
किससे कहती होगी वो अपने मन की बाते
अपने परिवार के प्रति फर्ज निभाती है
अपने प्रियतम की याद बहुत आती होगी न
इंतजार !!इंतजार!! इंतजार!!
सुनकर खुद को ढाढस देती होगी न
लेकिन कब तक .....।
कल ...परसो...या सदियों तक ....
शिल्पा मोदी✍️✍️

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