इस कहानी का किसी भी स्थान या व्यक्ति से कोई संबंध नही है!रूहानी एक पूरी तरह से काल्पनिक कहानी है!
पिछले भाग में आपने पढ़ा कि नितिन और स्वाति दोनो गाड़ी में अकेले निकल पड़ते हैं रूहानी से मिलने! अब आगे-
नितिन और स्वाति थोड़ी देर में ही जंगल पहुँच जाते हैं!वो दोनों गाड़ी में बैठे हैं और एक दूसरे को देख रहे हैं!तभी नितिन स्वाति से पूछता है मुझे ऐसा क्यों लगता है जैसे तुम मुझे कुछ कहना चाहती हो?बताओ स्वाति कुछ बात है क्या मन में?
स्वाति कहती है नही ऐसी कोई बात नही है नितिन,बस तुम्हारी चिंता हो रही थी!
तुम चिंता मत करो स्वाति,सब ऊपर वाले पे छोड़ दो!नितिन स्वाति को तसल्ली देता है!स्वाति भी नितिन का हाथ पकड़ कर उसे तसल्ली देती है!
दूसरी ओर नितिन के माँबाप नताशा और राज सिंघानिया रॉकी से फोन पे पता पूछकर सीधे मन्दिर आ जाते हैं!रॉकी और मन्दिर का पुजारी उन दोनों के साथ उनकी गाड़ी में ही जंगल के लिए निकलते हैं!तनु को रॉकी मंदिर ही छोड़ आता है क्योंकि उसकी तबियत ठीक नही होती है!वो चारों भी अब नितिन और स्वाति के पीछे आ रहे हैं!
दूसरी ओर,अब नितिन अपना हाथ स्वाति से छुड़ा कर कहता है स्वाति मैं चलता हूँ,अगर जिंदगी रही तो तुमसे बहुत सारी दिल की बातें करनी है!ये कहकर वो गाड़ी से बाहर आ जाता है!नितिन जोर से चिल्लाता है रूहानी,कहाँ हो तुम?लो मैं आ गया तुमसे मिलने!ठीक उसके पीछे रूहानी खड़ी है!वो नितिन से कहती है क्यों चिल्ला रहा है,मैं तो सालों से तेरा इन्तेजार कर रही हूँ यहाँ!देख पीछे मुड़के!
नितिन मुड़कर रूहानी की ओर देखता है!उसकी आँखों में गुस्सा भी है और दर्द भी!

वो धीरे धीरे नितिन की ओर बढ़ने लगती है!उसकी आँखों में अजीब सा गुस्सा है,ऐसा लगता है मानों आज वो नितिन को बहुत भयानक मौत देगी!नितिन खुद भी उसका भयानक चेहरा देख कर घबरा जाता है!जैसे-जैसे रूहानी उसकी ओर बढ़ रही है,वैसे-वैसे नितिन के कदम पीछे हो रहे हैं!स्वाति की धड़कनें भी बढ़ गई है!अब नितिन आत्मविश्वास के साथ एक जगह रुक जाता है और रूहानी से पूछता है कि रूहानी तुम आज मुझे खत्म करने जा रही हो,लेकिन पहले सिर्फ एक बार मुझे मेरी गलती तो बतादो?मैं सिर्फ ये जानना चाहता हूँ कि ऐसा मैंने क्या किया है जो तुम मुझसे या ओर पुरुषों से इतनी नफरत करती हो!सिर्फ एक बार मुझे बताओ कि ऐसा क्या हुआ है तुम्हारे साथ?
रूहानी उसकी बातें सुनकर रुक जाती है और कहती है तू सब जानता है,तूने क्या समझा कि मैं फिर से तेरी चिकनी-चुपड़ी बातों में आ जाऊंगी!अब मैं वो सीधी-साधी लड़की नही हूँ!ये कहकर वो नितिन की ओर बढ़ती है!लेकिन जैसे ही वो नितिन को हाथ लगाने लगती है कि तभी वो उसे हाथ लगाते ही दूर जाकर गिरती है!ये सब देखकर नितिन हैरान हो जाता है कि तभी स्वाति गाड़ी से बाहर आती है और कहती है नितिन जो मेरे पिताजी ने धागे दिए थे,वो तुम्हारे गले में है और जबतक वो तुम्हारे गले में है ये चुड़ैल तुम्हारा कुछ नही बिगाड़ सकती!ये बात पिताजी ने मुझे आज फ़ोन पे बताई थी इसीलिए मैं तुम्हें यहाँ भेजने को राजी हो गई थी!
नितिन कहता है स्वाति तुम्हे मेरी इतनी चिंता है मैं नही जानता था!लेकिन मैं अब इस रहस्य को जानना चाहता हूँ कि रूहानी को मुझसे इतनी नफरत क्यों है!ये कहकर वो खुद जैसे ही रूहानी की तरफ चला जाने लगता है कि तभी स्वाति उसका हाथ पकड़ कर रोकती है और गले से लगा लेती है!स्वाति कहती है नही मैं तुम्हे ऐसा नही करने दूँगी नितिन!

नितिन उसे खुद से दूर करके रूहानी की तरफ बढ़ता है,रूहानी भी अब सम्भल गई है!वो अब ओर ज्यादा गुस्से में आ जाती है और चिल्लाती है तुझे क्या लगता है कि ये धागे तुझे बचा लेंगे!नही इस बार मैं तुझे नही जाने दूँगी!
तभी नितिन कहता है मैं खुद ये धागा उतार देता हूँ!अगर मुझे मारने से तुम्हारा दर्द कम हो जाएगा तो ठीक है तुम मुझे मार सकती हो,ये कहकर नितिन ज्यों ही अपने गले से धागा उतारने लगता है कि तभी स्वाति उसे रोकती है!स्वाति कहती है नही नितिन प्लीज मेरे लिए ऐसा मत करो!
नितिन कहता है स्वाति मैं जानता हूँ तुम मुझसे बहुत प्यार करने लगी हो,मैंने तुम्हारी आँखों में देखा है!सच कहूँ तो मैं भी तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ!लेकिन मैं तुम्हारी बात अब नही मान सकता!ये कहकर नितिन अपने गले से धागा तोड़ कर फैंक देता है!नितिन अब खुद ही रूहानी की ओर बढ़ता है!रूहानी की भयानक हँसी पूरे जंगल में गूंज रही है!हा-हा-हा,तू आ ही गया मेरे पास!रूहानी का रूप अब बहुत भयानक हो चुका है और वो भी तेजी से नितिन की ओर बढ़कर उसे गर्दन से पकड़ लेती है!नितिन का दम भी अब घुटने लगता है!रूहानी के बड़े-बड़े नाखून नितिन की गर्दन को लहु-लुहान कर चुके है!स्वाति बेबस सी खड़ी ये सब देख रही है!तभी स्वाति को अपने पिताजी की कही बातें याद आती हैं कि बेटी अगर तुम चाहो तो जरूर नितिन की रक्षा कर पाओगी !स्वाति अब अपने गले का धागा निकाल कर रूहानी के माथे पर लगा देती है,जिससे रूहानी तड़प कर पीछे हो जाती है और नितिन उसके नाखूनों की कैद से आजाद हो जाता है!लेकिन रूहानी भी कहाँ हार मानने वाली थी!आज उसकी ताकत का सामना कोई नही कर सकता था!रूहानी अपनी आँखों से ही तेज हवा चलाती है जिससे स्वाति के हाथ से वो धागा टूट कर दूर जाकर गिरता है!स्वाति और नितिन भी उस हवा में सम्भल नही पाते हैं!अब रूहानी उस हवा को शांत कर देती है और फिर से नितिन को अपने नाखूनों से पकड़ लेती है!नितिन भी अब तड़पने लगता है!स्वाति फिर से उसे छुड़ाने की कोशिश करती है लेकिन कामयाब नही हो पाती है!
दूसरी ओर,नितिन के पापा बहुत तेजी से गाड़ी चलाकर आ रहे हैं और जल्द ही उस जंगल में पहुंच जाते हैं!
नितिन अब पूरी तरह से रूहानी की गिरफ्त में है!रूहानी जैसे ही अपने दाँत नितिन की गर्दन में गड़ाने लगती है कि तभी वहाँ आकर नितिन के पापा गाड़ी रोकते हैं!वो चारों जब देखते हैं कि नितिन की जान खतरे में है तो जल्दी से गाड़ी से उतर कर नितिन की ओर भागते हैं!नितिन के पापा जोर से चिल्लाते है छोड़ दे दुष्ट आत्मा मेरे बेटे को!
इस आवाज को सुनकर रूहानी का ध्यान नितिन के पापा राज सिंघानिया की तरफ चला जाता है!वो मुड़कर देखती है तो बस देखती रह जाती है!रूहानी के मूहँ से बस इतना ही निकल पाता है तू?????फिर वो दुबारा नितिन की तरफ देखती है!दोनो हूबहू एक जैसे!रूहानी अब समझ जाती है कि जिसकी उसे तलाश थी वो नितिन नही उसके पापा है!वो नितिन को छोड़कर राज की तरफ मुड़ती है और कहती है राजू,पहचाना अपनी रूही को????
राज उसकी तरफ हैरानी से देखता रह जाता है और रूहानी जोर जोर से हंस रही है!बाकी सब भी उन दोनों को देखकर हैरान हो जाते हैं,उनमे से किसीको कुछ समझ नही आ रहा कि राज का रूहानी से क्या रिश्ता है!आप भी ये जानने के लिए देखिए कहानी का अगला भाग
हर हर महादेव
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