आज मेरी बाबुल ने कर दी सगाई 
हो गई पराई मैं तो हो गई पराई
पंडित ने मंत्रों की दे दी दुहाई
कर दी विदाई मेरी कर दी विदाई

मिल कर के सबने है मण्डप सजाया
सखियों ने मिल कर के मेंहदी लगाया
पूर कर के चौक और गौरजा बिठाई
हो गई पराई मैं तो हो गई पराई

छूट गया आज मुझसे बाबुल का अँगना
सखियाँ सहेलियां मेरी आज कोई संघना
मां की गोदी का वो पलना
छूट गया है मेरा बचपना 

आज मेरे अपनों ने आँखें चुराई
हो गई पराई मैं तो हो गई पराई

आज मेरी बाबुल ने कर दी सगाई
हो गई पराई मैं तो हो गई पराई

✍️✍️आशीष सिंह
Call 112 लखनऊ