दर्द की कश्ती पर सवार है सब हमसफर
कश्ती डूबे ना किसी की खुदाया इस दौर में ।
गले भी लगेंगे हाथ में मिलाएंगे एक दिन जरूर
उम्मीदें ना टूटे यारो और अब इस दौर में ।
बेफिक्र बेनकाब होकर फिर से घूमेंगे
बस रखो कैद खुद को कुछ दिन के लिए इस दौर में ।
पूछना ना पड़े अपनों से कि कैसी है तबीयत तुम्हारी
द्दुआ करना ' सब सलामत रहे इस दौर में ।
जिंदगी कुछ ज्यादा की तमन्ना नहीं 'सीमा 'की बस
जो है पास हमारे बस वह तो कायम रहे इस दौर में।

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