विलंब ना करो, अविलंब आ जाओ
अँखियाँ तेरे दीदार को लालायित है
राहो पर नजरे गड़ी हुई है
विलंब न करो ,अविलंब आ जाओ
समय की घड़ीया अपनी गति मे चल रही है
जुबान लड़खड़ा रही है
साँसो की माला टूटने को है
जीवन की मोती बिखरने को है
विलंब न करो ,अविलंब आ जाओ
मेरी सुध लेने एक बार तो आ जाओ
कही देर न हो जाए
तुमसे मिले बगैर ही कही
दुनिया से रुखसत न हो जाऊँ
विलंब ना करो, अविलंब आ जाओ
मेरी चाहत को यूँ न बिसराओ
यूँ निगाहे हमसे ना चुराओ
मन मे है क्या तुम्हारे ,हमे बताओ
आखिरी विदाई के समय
मुझे यूँ न तड़पाओ
आकर के अपना वादा निभाओ
विलंब ना करो ,अविलंब आ जाओ
शिल्पा मोदी✍️✍️

0 टिप्पणियाँ