तिनका तिनका चुनकर लाती है, चिड़िया घोंसला बनाती है.....
अपने नन्हे नन्हे बच्चों को जिंदगी की धूप से बचाती है ....
कभी दाना डालती है, कभी दुलारती है कभी पानी पिलाती है......
जब बच्चों के पंख निकल आते हैं उन्हें आसमान में उड़ना सिखाती है .....
वह कभी नहीं मांगती अपनी ममता का हक ,मां है ना बस देती ही चली जाती है......
... ✍️ पिंकी मिश्रा

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