एक शख्स जिसकी मोहब्बत की रहूंगी मैं सदा गुलाम
एक शख्स जिसके तजुर्बे ने रखा हुआ है आज भी मुझे थाम,
एक शख्स जो आज भी मेरे ख्वाबों में रोज आता है
एक शख्स जो आंखों को मेरी आज भी भिगो जाता है।
एक शख्स जिसने मुझे बाहों का झुलाया झूला
एक शख्स जिसने ने किया मेरा हर ख्वाब पूरा
एक शख्स जिसने किया हर रोज यह साबित
कि वह जिसके वजूद से जन्म मैंने पाया,
कि वह जिसका हर पल रहा मेरे सिर पर साया
जो हर घड़ी रहा हमारी खातिर खुद को निचोड़ता
जो हर घड़ी फिक्र मंद रहा अपनी इच्छाओं को मरोड़ता
आजभी शायद उस जहां से वह दुआओं की झड़ी लगाता है आज भी शायद चांद तारों में उसका चेहरा मुझे दिख जाता है।
पापा आ जाओ एक बार फिर से
मेरा बीता बचपन अबभी तुम्हें बुलाता है।
पापा तुम मेरी उम्मीद तुम मेरे ख्वाब हो
दूर हो लेकिन हर पल मेरे साथ हो ।
पापा तुमको हम भुला नहीं पाते हैं ,
तुम आज भी हर वक्त बहुत याद आते है
बहुत याद आते हैं।
सीमा कौशल
यमुनानगर हरियाणा

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