वटवृक्ष हैं, पिता जी हमारे,
घर के आधार स्तम्भ, पिता हमारे,

दिन रात, करते मेहनत,
घर के मुखिया हैं, पिता हमारे,

परिवार से, दूर रहकर वो,
सुकून के पल, वो कहाँ पाते,

दिन रात करते, कड़ी मेहनत,
सुख चैन, कहाँ वो पाते,

अपने दुखों को,सह कर के,
गहन छाया, हमको देते,

धूप की तपन हो या बारिश,
अपनों के लिए,वो जीते जाते,

हर समस्या का, समाधान करते,
कठिन राह पर,चलना हमें सिखाते,

अपना सुख चैन,गंवा कर,
साथ निभाते सबका, जीवन भर,

परिस्थितियों से, जूझ कर,
जीने की राह, सदा हमें दिखाते,

वट वृक्ष हैं, पिता जी हमारे,
धन्य हैं, पिता जी हमारे ।

       काव्य रचना-रजनी कटारे
             जबलपुर ( म.प्र.)