महंगाई की बढ़ रही रफ्तार,
आम जनता का जीवन हो गया बेजार....।

    निम्न वर्ग कर सकता है श्रम,
    उच्च वर्ग को भी नहीं है कोई गम,
   मध्यमवर्गीय सोच रहे,क्या खाये और
     क्या बचाये हम...........,
  जीवन लगता है बेकार..................।

माना कि महामारी का है दौर,
अभी अर्थव्यवस्था थोड़ी है कमजोर ,
लेकिन जिसका पेट नहीं भर रहा,
वो तो मचाएगा ही शोर.......।

           आम जनता कर रही पुकार,
           कुछ तो हल निकालो देश की सरकार,
          हमने अपने मताधिकार से बनायी,
          आपको सरकार............
         और हम पे ही अब अत्याचार........।

बचपन में सुनी थी हमने, तेनालीराम की कहानी,
राजा अपने प्रजा की करती थी,रखवाली,
अब लगता है ये बातें थी,सिर्फ कहानी.....।

        हे,देश की सरकार,
        जनता कर रही हाहाकार,
अब ना बढ़ाओ महंगाई की रफ्तार ,क्या हमारी थाली,
में अब यही होगा..…..........?????
दाल,   रोटी,   और   अचार.......।
  
हम पूछेंगे ये प्रश्न बार-बार??????
    नहीं सहेंगे महंगाई की मार...........।
                                  ऋचा कर्ण ✍✍