कृत्यों का खेल है ये नायक ,खलनायक।
कभी कभी हमारी सोच से एक नायक भी खलनायक होता है।
ये सब सोच का असर होता है।
देश को आजादी दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हमारे नायक ,अंग्रेजों की नजर में खलनायक थे।
बच्चों को सही काम करने की सलाह देने वाला पिता उनका खलनायक होता है।
मैं छोटी थी ,तो गर्मियों की छुट्टी में गांव जाना होता था।संयुक्त परिवार के मुखिया हमारे दादा जी थे।
वो नियम कानून के पाबंद ,और बड़ों के लिए सख्त थे,लेकिन छोटे बच्चों को बहुत प्यार करते थे।
जब उनके ऑफिस से आने का समय हो तो सारे चाचा सजग हो जाते थे। हमारे 4 चाचा थे।और पापा बड़े थे वो दूसरे राज्य में कार्य करते थे,इसलिए हमारा आना गर्मियों की छुट्टी में होता था।
दादा जी रेलवे में कार्यरत थे। हर कोई अपने काम में लग जाता ।उनकी स्कूटर रुकती बच्चे तो दौड़ते क्योंकि वो पारले बिस्किट लाते थे। पारले बिस्किट का बड़ा क्रेज था ,हम बच्चों के बीच।जो घर में सबसे छोटा था ,वही बांटता था,कभी कभी उसे ही नहीं मिलता था तो दादाजी अलग से उसे एक पैकेट और दे देते ,उसकी ईमानदारी के लिए।
चाय के बाद , चाचा लोगों को पेशी होती ,जो जो काम उन्हें दादा जी बता कर जाते ,खेत का ,वो पूरा ब्योरा लेते ।
सबकी जान सांसत में रहती।जब दादा जी खा कर सोने के लिए बाहर जाते ,(उस समय गांव के सभी मर्द बाहर सोते थे),तब चाचा लोग और घर के सभी लोग हंसी मजाक करते ,और कहते भैया ,आज तो विलन संतुष्ट हो गए,अब देखो कल क्या काम बताते हैं।
ज्यादातर चाचा उन्हें मुंह पर तो बाबूजी और पीठ पीछे विलन बुलाते थे।उनका दादाजी का दिया नामकरण मेरी छोटी सी खोपड़ी में नहीं घुसता।
एक दिन मैं दादाजी के पास गई , चाचाओं की चुगली करने ।
बाबा _मैने कहा।
हां। गुड़िया बोल_दादा जी ने कहा।
आपको न चाचा लोग विलन बुलाते हैं_,मैंने कहा (मेरा लहजा शिकायती था)।
दादाजी हंसने लगे।मैं उनका मुंह देख रही थी।
दादाजी ने कहा_हां ,गुड़िया मुझे मालूम है।
थोड़ा रुक कर मैने पुनः पूछा_क्यों ?आपको गुस्सा नहीं आता।
दादा जी ने कहा _देख गुड़िया अगर सबको अपने मन का काम करने दो ,टोंका टोकी न करो ,गलत पर न रोको,तो आप बहुत अच्छे होंगे।लेकिन मैं जानता हूं कि क्या सही है क्या गलत ,वो गलतियां करकर सीखें ,उससे पहले मैं अपने अनुभव से उन्हें सिखा दूं।
आज मैं उनके लिए विलन हूं,लेकिन कल जब उन पर जिम्मेदारी आएगी ,तो मेरी सख्ती मेरी कही बातें ,सही लगेगी और मैं ही नायक ,और उनका आदर्श बन जाऊंगा ।ये समय समय और परिस्थितियों की बात है।

0 टिप्पणियाँ