भाव यह है की प्रेम दोनों तरफ है लेकिन कहने मे दोनों ही झिझक रहे हैं. तो प्रेमी अपने मन के भाव के साथ साथ प्रेमिका के मन के भाव को अपने शब्दों मे कह रहा है
हम उनको अपने पास बुलाना चाहे तो बुलाएँ कैसे
हम उनको अपना प्यार जताना चाहें तो जताएं कैसे
बहुत बेचैनी सी हो रही है अब मुझे
हम उनके दिल मे समाना चाहें तो समाएं कैसे
वो कहना चाहती है मुझसे अपने मन की बात
मगर बयां नहीं कर पाती अपने जज़्बात
वो डरती है शायद ज़माने की बुरी नजरों से
बेवजह की बनती बिगड़ती खबरों से
हम उसका संकोच मिटाना चाहे तो मिटाए कैसे
हम उनके दिल मे समाना चाहे तो समाए कैसे
अब क्या करें "लखनवी" कुछ बूझता नहीं
एक उसके सिवा दूसरा कोई सूझता नहीं
कितनी शिद्दत है मुझे उसे पाने की
कितनी शिद्दत है मुझे उससे दिल लगाने की
हम अपने दिल की बात उसे बताना चाहें तो बताएं कैसे
हम उनके दिल मे समाना चाहे तो समाएं कैसे
मै उसकी जिंदगी मे उजाला बन जाऊं
मै उसकी जिंदगी का झिलमिल सितारा बन जाऊं
वो आएं और अपना लें मुझे
मै उसके साहिल का किनारा बन जाऊं
हम अपना जख्म उसे दिखाना चाहें तो दिखाएँ कैसे
हम उनके दिल मे समाना चाहे तो समाएं कैसे
हम उनको अपने पास बुलाना चाहे तो बुलाएँ कैसे
हम उनको सीने से लगाना चाहें तो लगाए कैसे
बहुत बेचैनी सी हो रही है अब मुझे
हम उनके दिल मे समाना चाहें तो समाए कैसे
आपका मुकेश लखनवी

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