मन एक दर्पण है,
मेरी उम्मीदों का,
मेरी कल्पनायों का,
मेरी आकांक्षाओं का,
मन एक दर्पण है।
मेरे अंदर छिपी हुई हर बुराई का,
दूसरों में नजर आती हर अच्छाई का,
एहसास कराता है हमें,
जीवन की हर सच्चाई का,
मन एक दर्पण है।
भक्ति का सागर है,
प्रेम की छलकती गागर है,
अपनों का प्यार है,
खुशियों का संसार है।
मन एक दर्पण है,
मौलिक एवं (स्वरचित)
शीला द्विवेदी
उरई (जालौन)
उत्तर प्रदेश

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