वीना और वीरेंद्र एक दूजे के लिए ही जैसे बने हों। उनकी शादीशुदा जिंदगी आहिस्ता आहिस्ता रफ्तार ले रही थी।
वीरेंद्र कॉलेज के प्रोफेसर थे,और वीना एक होम मेकर ।दोनों के प्रेम की निशानी एक छोटी सी गुड़िया ने उनकी बगिया को हरा भरा कर दिया।दिन भर वीना का घर मेघना से गुलजार रहता ।शाम को जब बिरेंद्र आते तो जैसे पूरी बगिया महक उठती।
लेकिन होनी तो होकर रहती है,पता नहीं इस बगिया को किसकी नजर लग गई।विनीता की हंसती खेलती जिंदगी को जैसे ब्रेक लग गया।
एक दिन जब प्रोफेसर वीरेंद्र कॉलेज से लौटे तो उनके पैर थरथरा रहे थे।
वीना ने पूछा _क्या हुआ जी?पानी लाऊं।
वीरेंद्र ने कहा _हां,मुझे प्यास लग रही ,पानी दे दो।
वीना पानी लेकर आई,लेकिन ये क्या प्रोफेसर वीरेंद्र से पानी का ग्लास छूट गया,उनके हाथों में अब ग्रिप नहीं बन रहा था।
वीना उनको अपोलो हॉस्पिटल ले गईं।सारे चेकअप हुए,पता चला की वीरेंद्र को न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर हो गया था।वो मल्टीपल स्क्लोसिस नामक बीमारी के शिकार हो गए थे।
धीरे धीरे उनकी स्थिति गंभीर होने लगी ,वे व्हील चेयर पर आ गए।
सारी जिम्मेदारियां वीना के कंधे पर आ गईं।एक होममेकर का दायरा सिर्फ उसका घर,ही होता है।अचानक से सारी जिम्मेदारियां आ जाना ,व्यक्ति को तोड़ कर रख देता है।
लेकिन कहते हैं ना ,सोना तब निखर कर आता है ,जब उसे आग में तपाया जाता है।
अब यहां से शुरू होता है एक घरेलू गृहिणी का सुपर विमेन बनने का सफर ।जो बनाता है उनको एक प्रेरणाश्रोत , उन सबके लिए जो कठिन परिस्थितियों से जूझ रही हैं।
हार कर बैठ जाना ,कायरता है,आप समाज से कितने भी घिरे हो,कुछ दिन समाज और रिश्तेदार आपकी मदद करते हैं,बाद मेंना सफर स्वयं तय करना होता है,बिना बैसाखी के ,खुद पर भरोसा करके ।
एक समय ऐसा आया ,जब वीरेंद्र व्हील चेयर से सीधे बिस्तर पर आ गए।हुआ यों कि न्यूरोलिजिकल डिसऑर्डर में दवा में ज्यादातर स्टीरॉयड दी जाती है,उसका परिणाम ये हुआ कि हड्डियां कमजोर हो गईं और कई जगह से हड्डियां टूट गईं। अब सिर्फ लेटने के अलावा कोई उपाय नहीं बचा।
अब ..............।
अभी तक तो हर महीने प्रोफेसर वीरेंद्र की तनख्वाह आ जाती थी,लेकिन अब मुसीबत ने नए सिरे से दस्तक दी।
कॉलेज की तरफ से पत्र आया ,वीआरएस के लिए , कि अब वे वीरेंद्र को ऐच्छिक अवकाश के लिए बाध्य कर रहे थे।
वीना को ये गलत लगा ,उन्होंने बहुत लोगों से मंत्रणा की,जानकारियां जुटानी शुरू की ।
जब तक अपने उपर नहीं पड़ती ,सभी कानून से अनजान ही रहते हैं, बीना ने डिसेबिलिटी एक्ट 1995 पढ़ा ,जिसमे साफ साफ लिखा था कि ,सेवाकाल में रहते अगर व्यक्ति विकलांग होता है,तो उसे सेवा से नहीं निकाला जा सकता है,उसे उसके काम के लिए अनुकूल परिस्थिति बहाल करके दी जाएगी।
वीना ने इसे आधार बना कानूनी लड़ाई लड़ ,कॉलेज से पति की नौकरी बहाल करवाई।उन्होंने कार चलाना सीखा ,वो बाहरी सारे काम ,जो उन्होंने कभी भी नहीं किया था,इनकम टैक्स के दफ्तर में चक्कर लगाए,बैंक ,बाजार हर जगह ,और सबसे बड़ी बात एक अपाहिज पति की हर जरूरतों का ध्यान रखा।
जिस समय ये सब उथल पुथल हो रही थी ,उनकी जिंदगी में ,उस समय बेटी की उम्र महज 8साल की थी।
लेकिन वीना ने सारी परिस्थितियों का सामना किया ।
सबके प्रति अपने दायित्व को निभाया।
पति वीरेंद्र के गर्दन से ऊपर का हिस्सा ही सिर्फ काम करता है,जिससे वो अपनी बात,और वीना को गाइड करते रहे।
ऐसी स्त्री, जिसके लिए एक दिन के 24घंटे भी कम पड़ते हों ।वो एक मिसाल है ।सही मायने में एक नायिका जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
समाप्त
यह कहानी सत्य घटना पर आधारित है।

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