वे और लोग होंगे, जो डर डर के जीते हैं यहां ,
मुझे तो हर घड़ी नहीं चुनौतियों का इंतजार है......
तूफान से टकरा कर किनारे लगी है कश्ती मेरी,
अब तो समंदर की लहरों से बहुत प्यार है.....
मैं अब नहीं उलझी रहती हूं, अपने ही बुने सवालों के जाल में ,
देखकर उठती हुई उंगलियां ,अब न नजर बेकरार है....
ए जिंदगी तेरा शुक्रिया, तुमसे कोई गिला नहीं,
जब मेरी कोशिशें ही कम रही ,तब ही मिली हार है....
डर से डूबते देखा है तूफान में लोगों को अक्सर,
हौसलों के आगे तो, तूफान भी लाचार है.......
......✍️ पिंकी मिश्रा

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