पिछले भाग में आपने पढ़ा कि अजय और शिवानी को मिलते हुए तीन दिन हो जाते हैं,दादाजी(अजय) को निखिल और उसके दोस्त आगे की कहानी सुनाने को कहते हैं,अब आगे

दादाजी(अजय) अब आगे की कहानी शुरू करते हैं!

फ्लैशबैक-आज उन्हे फिर से मिलना था वहीं उसी अदरक वाली चाय की दुकान पर!आज अजय ने उसे 10 बजे ना बुलाकर बल्कि 9बजे बुलाया था!क्योंकि उसका कॉलेज भी आज 9बजे से ही था!अजय भी समय पर ही वहाँ पहुँच गया था!दोनों ने एक साथ चाय पी और अजय ने कहा शिवानी कोई ऐसी जगह चलें घूमने जहाँ यहाँ से भी ज्यादा बर्फ पड़ती हो!

अरे आप तो मुझे ऐसे कह रहे हो जैसे मैं आपकी गाइड हूँ,शिवानी मजाक में कहती है!


अरे तुम तो मेरी जिंदगी की गाइड बन चुकी हो अब!हमेशा तुम ही तो गाइड करोगी मुझे!अजय उसे प्यार से जवाब देता है तो शिवानी भी हँसने लगती है!


अच्छा चलिए,आपसे बातों में कौन जीत सकता है भला?शिवानी ये कहकर अजय का हाथ पकड़ती है और चल पड़ती हैं!

अजय रास्ते में पूछता है हम कहाँ जा रहे हैं आज?

आप कुछ पूछिये मत बस गाड़ी चलाइये जहाँ हम कहें ओर थोड़ा जल्दी भी क्योंकि हमें शाम तक घर वापिस भी आना है!

अजय भी अब जहाँ-२ शिवानी कहती है उन्ही रास्तों से होकर एक बहुत ही सुंदर जगह पर पहुँच जाता हैं!पूरा शहर बर्फ से ढका हुआ था!अजय तो बस देखता ही रह जाता है!उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो जैसे कहीं जन्नत में आ गया हो!अब वो शिवानी से पूछता है शिवानी ये कौनसी जगह है?


शिवानी उसे कहती है की इस जगह का नाम है कुफरी और देखो ये शिमला से ज्यादा दूर भी नही है!सिर्फ हमे 12 से 13 किलोमीटर  का ही सफर करना पड़ा!अब हम समय पर घर भी आराम से पहुँच जाएँगे!

दोनों सारा दिन खूब मस्ती करते हैं क्योंकि बर्फ वहाँ बहुत ज्यादा थी जो कि एक रात पहले ही पड़ी थी तो वो बर्फ से भी खेलते हैं!अब शिवानी अजय से कहती है अब हमे चलना चाहिए,लगता है जैसे बर्फ पढ़ने वाली है!

लेकिन लग तो नही  रहा शिवानी कि अभी बर्फ पड़ सकती है!अजय आसमान को देखकर कहता है!

देखिए,मुझे पता है यहाँ के मौसम का,यहाँ बर्फ कभी भी पड़ सकती है!इससे पहले कि हम फंस जाएं चलिए चलते हैं वापिस!अब वो दोनों गाड़ी में बैठते हैं और चल पड़ते हैं वापिस!लेकिन आज शायद किस्मत को कुछ ओर ही मंजूर था इसीलिए अभी उन्होंने सफर शुरू ही किया तो तेज बर्फ पड़ने लगी और बर्फीला तूफान भी आ गया!शिवानी को अब घर जाने की चिंता सताने लगी!अजय ने उसके चेहरे पर चिंता के भाव देखकर आश्वासन दिया कि चिंता मत करो  हम पहुँच जाएँगे समय पर!लेकिन ऐसा हो नही पाया!बर्फीला तूफान इतना तेज था कि गाड़ी चलाना भी मुश्किल हो रहा था!फिर अजय ने ना चाहते हुए भी गाड़ी को एक  तरफ एक घर के बाहर लगा लिया!

शिवानी अब पूरी तरह से घबरा चुकी थी और बोली आपने गाड़ी क्यों रोक दी?

अरे आप देख तो रहीं है कि इतने तूफान में जाना खतरे से खाली नही है!अजय ने शिवानी को समझाया!

शिवानी अब खामोश सी बैठ गई उसे अब बहुत ज्यादा घर की याद आने लगी!बर्फ इतनी ज्यादा पड़ रही थी कि गाड़ी के शीशों पर भी जमने लगी!अब अजय थोड़ी हिम्मत करके  गाड़ी से उतर कर सामने बनी एक झोंपड़ी में गया और उसने वहाँ रुकने के लिए जगह माँगी!वहाँ एक महिला अपने दो बच्चों के साथ थी क्योंकि उसका पति किसी कार्य से बाहर गया हुआ था!उसने कहा घर मे दो ही कमरे हैं एक में आप रुक जाइये और दूसरे में हम!

अजय वापिस आया और शिवानी को साथ चलने को कहा!

शिवानी ने मना कर दिया और बोली नही मुझे घर जाना है!वहाँ सभी मेरी चिंता कर रहे होंगे!

अब अजय ने जबरदस्ती उसका हाथ पकड़ा और गाड़ी से बाहर निकाल कर गाड़ी लॉक करदी!लेकिन शिवानी अब भी  नही मान रही थी तो अजय ने उसे जबरदस्ती गोद मे उठाया और झोंपड़ी में ले गया!उन दोनों को इस तरह आते देखकर उस औरत को लगा कि ये जरूर पति-पत्नी है!

अब अजय उसे उस खाली पड़े कमरे में लाया लेकिन शिवानी अभी भी घर जाने की जिद कर रही थी और बहुत रोने भी लगी!

तब अजय ने उसे गले लगाकर चुप करवाया और बोला तुम चिंता मत करो,कल मैं खुद तुम्हे छोड़ने तुम्हारे घर चलूँगा!तुम्हे कभी रुसवा नही होने दूँगा,ये मेरा वादा है तुमसे!

लेकिन अजय जब ये बात सबको पता चलेगी कि मैं रात भर  तुम्हारे साथ थी तो?इतना कहते ही शिवानी की जुबान लड़खड़ा गई!

तभी अजय कहता है जब इतना भरोसा करती हो तो आज की रात भी भरोसा करके देख लो!मैं वादा करता हूँ जैसी तुम अपने पापा के घर से आई हो बिल्कुल वैसी ही तुम सुरक्षित वापिस जाओगी!

अजय की बातें सुनकर शिवानी को अब कुछ तसल्ली होती है!वो अजय को गले लगा लेती है!तभी वहाँ वो औरत आ जाती है लकड़ियाँ लेकर और चिमनी में जला देती है!अब वो भली औरत दोनों को खाना खिलाती है!रात के 12बज चुके हैं और बर्फ है कि थमने का नाम ही नही ले रही!

अजय और शिवानी को नींद नही आ रही है!शिवानी खामोश सी रजाई ओढ़े बैठी है और अजय चिमनी के पास बैठा हाथ सेंक रहा है!अब शिवानी को भी अजय की चिंता होती है और वो उससे बिस्तर में आने को कहती है!जब अजय आने से मना कर देता है तो शिवानी कहती है जब मैं तुम पर भरोसा कर रही हूँ तो तुम भी मुझपर भरोसा कर सकते हो!जैसे आए हो वैसे ही वापिस जाओगे एकदम सुरक्षित!

शिवानी की बात सुनकर अजय मुस्कुराने लगता है और उसके पास आकर बैठ जाता है!धीरे-२ लकड़ियां भी खत्म हो जाती है और सर्दी भी बढ़ जाती है!अब वो दोनों ओर करीब आकर बैठ जाते हैं!शिवानी ठंड की वजह से अजय के गले लग जाती है लेकिन अजय अपनी भावनाओं पर पूरी तरह से नियंत्रण रखते हुए उसका सिर अपनी गोद मे रख कर उसके माथे को चूमता है और कहता है सो जाओ अब!

ना जाने कब दोनों की ही आँख लग जाती है!सुबह जब शिवानी की आँख खुलती है तो वो देखती है कि अजय बैठा हुआ ही सो रहा है और वो उसकी गोद मे सिर रख कर!

शिवानी को अपनी गलती का एहसास होता है और वो उठकर उसे पूरी तरह से रजाई में ढककर लेटा देती है और खुद से ही कहती है हे भगवान मेरी वजह से सारी रात अजय ने बैठ कर गुजारी है,कभी बीमार ना हो जाए!मैं भी कितनी पागल हूँ!तभी अजय भी आँखे खोलता है और शिवानी को अपनी ओर खींच कर गले से लगा लेता है!शिवानी तब कहती है ओह तो तुम जाग रहे थे!

जी हाँ,जब आपने मुझे इतने प्यार से लिटाया तभी मेरी आँख खुल गई थी!अजय उसे कहता है कि तभी वो औरत आकर दरवाजा खटका देती है!

अब दोनों बैठ जाते हैं और वो औरत उन्हें चाय देती है!

अजय उस औरत से पूछता है दीदी क्या मौसम साफ है बाहर,रास्ते खुल गए होंगे क्या?

वो औरत कहती है कि रात 2बजे के बाद मौसम साफ हो गया था इसीलिए यात्रियों को परेशानी ना हो सुबह ही कर्मचारियों ने रास्ते साफ कर दिए होंगे!

अब शिवानी और अजय जल्दी से चाय पीकर उठते हैं और उस गरीब औरत को कुछ पैसे देते हैं!वो औरत कहती है दीदी कहते हो और पैसे भी देते हो!

अजय तब कहता है बहन छोटी हो या बड़ी कभी  भी खाली हाथ नही आना चाहिये!ये अपने बच्चों के नाम के रखलो!अब दोनों दुबारा वहाँ आने का वादा करके चल पड़ते हैं वापिस!


वर्तमान समय-अब निखिल दादाजी(अजय) को कहता है क्या दादू इतना अच्छा मौका मिला था आपको लड़की के साथ रोमांस का,वो भी आपने यूँ ही गवा दिया!

तभी दादाजी कहते हैं यही तो फर्क है तुम्हारे और हमारे प्यार में!जिसे तुम प्यार कहते हो वो एक आकर्षण के सिवा कुछ नही!असली रोमांस तो आँखों से होता है,शरारत से होता है!प्यार वही है जब लड़का लड़की को एक मौका ना समझकर जिम्मेदारी समझे!

उन तीनों को दादाजी की दी हुई सीख ठीक लगती है और वो वादा भी करते हैं कि अब से हम कभी किसी लड़की के साथ कुछ गलत करने का सोचेंगे भी नही!

अब जगत कहता है अच्छा दादू आगे क्या हुआ,ये तो बतादो?शिवानी जब घर गई तो उसके घर वालों ने क्या किया उसके साथ?


अगला भाग-कल

ॐनमःशिवाय
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