तुम दुग्ध मैं दधि प्रिये
दोनों मिल घृत बन जाते हैं।
तुम नयन में नींद तुम्हारी
दोनों मिल ख्वाब देखते हैं।
तुम कलम मैं स्याही प्रिये
दोनों मिल प्रेम-पत्र बन जाते हैं।
तुम पुष्प मैं कली प्रिये
दोनों मिल महक बन जाते हैं।
तुम घन मैं घटा प्रिये
दोनों मिल बरस जाते हैं।
तुम दीपक मैं बाती प्रिये
दोनों मिल आरती गाते हैं।
तुम मोती मैं धागा प्रिये
दोनों मिल हार बन जाते हैं।
तुम शब्द में भाव प्रिये
दोनों मिल कविता बन जाते हैं।
तुम कन्दर्प में रति प्रिये
तन-मन से मिल जाते हैं।
तुम राकेश मैं गरिमा प्रिये
दोनों मिल गरि-केश बन जाते हैं।
गरिमा राकेश गौत्तम
खेड़ली चेचट राजस्थान

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