✍️ तू अदृश्य छुपकर ही वार करता 
है कितने लोगों की मौत की नींद सुला दिया
  अब सुलाने की बारी  तेरी आई है।
 हमने भी संकल्प खाई करोना को भगाना है कोरोना का टीका लगवाना है। 
भारत का नागरिक का फर्ज बस निभाना है कोरोना का टीका सबको लगवाना है। 
ना जाने  कितने घरों को बर्बाद किया 
कितने मां बहनों का घर नाश किया ‌। 
अब हमने भी संकल्प ठाना कोरोना को भगाना है। 
इस महामारी में तूने इंसान के इंसानियत को दिखा दिया
 अपने को बेगाने बना दिया अब तुझे जड़ से भगाना है फिर से भाईचारा दिखाना है। 
गंगा नदी में तैरते लाशों को देख कर मन रोता है मानव की दुर्दशा अपने आंखों दिखला दिया। कभी सोचा ना था यह दिन भी आएंगे 
मानव यह दुर्गति पाएंगे। 
आंखों से आंसू बहते हैं 
जो मानव मंगल ग्रह पर बसने की बात सोचता था आज धरती पर ऑक्सीजन के बिना मरते जा रहे  कोरोना को हराना है देश दुनिया से  भगाना है। सब को संकल्प लेना है कोरोना को हराना है। 
अमन-चैन आएगी फिर से खुशहाली आएगी मानव को कोरोनावायरस सिखा दिया
 प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना कितना महंगा है बतला दिया
 हे मानव अब संभल जा प्रकृति से प्रेम करना सीख जा। 
कोरोना को हराना है पूरे देश विदेश से भगाना है सबको संकल्प निभाना है कोरोना का
टीका का सबको लगवाना है।................

सपना कुमारी
 बिहार पटना