भाव यह है की जिससे आप बेहद मोहब्बत करते हो अगर वो आप का साथ छोड़ दे तो दिल से यही निकलता है.
बहुत बदल गयी हो तुम
शायद बहुत आगे निकल गयी हो तुम
अब तुम्हे मेरी कोई जरुरत नहीं
शायद वक़्त रहते संभल गयी हो तुम
बहुत बदल गयी हो तुम
वक़्त भी करवट बदलता है
कहाँ जीवन एक सा चलता है
यहाँ पल भर मे अपने पराये हो जाते है
मनुष्य गिर कर ही संभलता है
अब चमन मे फूल नहीं खिलते
जिसे अपने हांथों से मसल गयी हो तुम
बहुत बदल गयी हो तुम
हर बार मौसम एक जैसा हो
ये जरूरी तो नहीं होता
बसंत के बाद पतझड़ तो आता ही है
ये जिंदगी भी बादल जैसी है
उमड़ती घुमड़ती
कभी दूर सी लगती है
कभी पास सी लगती है
कभी हवा के हल्के झोंके से गायब हो जाती है
सायद उन बादलों की तरह मचल गयी हो तुम
बहुत बदल गयी हो तुम
चलो अच्छा ही हुआ
तुम्हारा बदलना भी जरुरी था
वक़्त के साथ साथ चलना भी जरुरी था
आखिर कब तक बर्दाश्त करती तुम मुझे
बहुत उड़ने लगा था मै
पर कतरना भी जरुरी था
शायद अब पछतावे की आग मे जल गयी हो तुम
बहुत बदल गयी हो तुम
शायद बहुत आगे निकल गयी हो तुम
अब तुम्हे मेरी कोई जरुरत नहीं
शायद वक़्त रहते संभल गयी हो तुम
आपका मुकेश "लखनवी"
अस्वीकरण :- इसका मेरे वास्तविक जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं है. ये कल्पना पर आधारित है

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