पितृ देवोभव

अपने बच्चों से कुछ कहना चाहता है वो 
अपने अरमानो को छिपाता है 
वो एक बाप है जो आने वाले कल के लिए आशियाना बनाता है 

जब वही बच्चा उसके दिल को ठेस पहुंचाता है 
तो वो बाप अपने आंसुओं को छिपाता है 
हर पल मरता है वो हर पल मुस्कुराता है 
वो एक बाप है जो आने वाले कल के लिए आशियाना बनाता है 

हर पल सोचता है वो 
आएंगे मेरे काम मेरे भी बच्चे 
लेकिन रोक लेता है वो जुबान 
और कुछ कह नहीं पाता है 
अब कौन करेगा उसकी देखभाल बुढ़ापे मे 
ये सोचकर उसका जी घबराता है 
वो एक बाप है जो आने वाले कल के लिए आशियाना बनाता है 

वो रोज उठता है और सोचता है आने वाले भविष्य के लिए 
जी तोड़ मेहनत करता है वो 
और पैसा कमाता है 
और वही बच्चा जब अपने बाप को आँख दिखाता है 
तो वो बाप जीतेजी मर जाता है 
वो एक बाप है जो आने वाले कल के लिए आशियाना बनाता है

सबसे बचता फिरता है वो अपने आंसुओं को छिपाता है 

पूछता है वो एक ही सवाल अपने बच्चों से 
क्या कमी रखी मैंने तेरे परवरिश मे 
क्या इतना भी हक़ नहीं की मै तुम्हे कुछ बोल सकूँ 
तेरे उज्जवल भविष्य के लिए तेरी मै आँख खोल सकूँ 
क्या हुआ अगर मैंने कुछ कह दिया तुमको 
तू क्यों मुझे सबके सामने आँख दिखाता है 
वो एक बाप है जो आने वाले कल के लिए आशियाना बनाता है

जिस दिन खुद बनेगा बाप उस दिन पूछूंगा मै तुमसे 
जब तेरा ही बच्चा तुझको आँख दिखाएगा 
जब तेरा बच्चा खुद तुझे एक बेटे का फर्ज़ सिखाएगा 
उस दिन तेरा सर भी शर्म से झुक जाएगा 
तू रोएगा, सहमेगा, पछतायेगा 
और कहेगा अपने आप से 
कि, अगर अपने बाप को सताया न होता 
तो मेरा बेटा मुझे आँख दिखाया न होता 

इसलिए हर वक़्त इज़्ज़त करो अपने बाप की 
उनके जिंदगी के साथ भी और उनके जिंदगी के बाद भी

आपका मुकेश लखनवी