सत्य असत्य में  भेद बताता,
नीति धर्म ज्ञान हमें सिखलाता,
बुजुर्गों का  सम्मान बताता,
बच्चों से है प्यार जताता,
छोटे बड़ों का फर्क समझाता,
वो आचरण है  कहलाता।

सादर मातु-पिता गुरु पूजा,
एहि सम जगत धर्म नही दूजा,
मीठे-मीठे बोल सिखाता,
प्रेम से सबको अपना बनाता,
दुश्मन को भी गले लगाता,
वह आचरण है कहलाता।

भूखे को जो भोजन देता,
और प्यासे को पानी देता,
बिपति पड़े तो हाथ बढ़ाता,
दुख सुख में साथी बन जाता,
औरों की जो खुशी के खातिर,
सर्वस्य न्यौछावर कर देता 
वह आचरण है कहलाता।

शीला द्विवेदी "अक्षरा"
उत्तर प्रदेश