आँखे क्यों है उदास, मेरी तरहां तेरी भी
होठों पे इक प्यास, मेरी तरहां तेरी भी
यकीन है कि फिर भी जिन्दगी हसीन है, 
दिल में है इक आस,  मेरी तरहां तेरी भी।।

फिर अहसासों के पन्नों में आज कहीं से,   
इक तस्वीर निकल के छा गई हर तरफ।
कि अन्जानी सी दस्तक ,मचल उठा दिल, 
यकीन है ये हालत, मेरी तरहां तेरी भी।।

तुम्हे डर है,  कहीं इकरार ना हो जाये,
ना ना करते,  कहीं प्यार ना हो जाये। 
हम डरने लगे, कहीं इन्कार ना हो जाये 
जैसे उधार का हो प्यार,  मेरी तरहां तेरी भी।।
रंजन लाल ⚘