वर्षों बाद मिलें हैं हम तुम
नजरें झुका क्यों बैठे हैं गुमसुम
आओ फिर उन हसीन वादियों में हो जाएं गुम
लौटकर आया है फिर वही प्यार का मौसम
ए मेरे हमदम ।

लब खुले ना खुले 
आंखें बयां कर ही देती है दिल की बातों को
ना मैं भूला ना तुम भूली 
सागर किनारे उन हसीन मुलाकातों को

आता था अक्सर मैं तुम्हें ढूंढने मगर
तुम नहीं थे फिर भी यहीं कहीं थे
अकेले में खुद से ही तकल्लुम किया करते थे
खो जाते थे दिल के जज़्बातों में
सुनाई देती थी तेरी पुकार 
तेरे प्यार भरे तरन्नुम कानों में गुंजा करते थे ।

जागकर ख्वाबों की दुनिया से आसमां को जब निहारते थे
दूर कहीं अब्र में बस तुम  ही नज़र आते थे
होंठों पर तबस्सुम लिए जाने कहां ओझल हो जाते थे

लिखता था जब तेरा नाम मिट्टी का दिल बना मिट्टी पर
लहरों को भी नागवार गुजरता था
आखिर लहरें दिल में उठी लहरों को पहचान जाती थी
अश्कों से तूफान ना आ जाए सागर में 
तभी वो उठ उठ कर तेरा नाम मिटाती थी
फिर भी नादान थी बेचारी लहरें
सागर से गहरे कल्ब की गहराई में लिखा था नाम तेरा
ये बात भला वो कब जानती थी।
ये बात भला वो कब जानती थी।।


तकल्लुम-बातचीत
तरन्नुम-मधुर स्वर
अब्र-बादल
तबस्सुम-मंद मंद मुस्कान
कल्ब- दिल

पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐