कोई तो दिन है,
जो पृकृति और पर्यावरण के नाम है
वरना अब तक तो
बस हम उनसे लेते आये काम हैं।
कभी हवा ओक्सिजन ली जीने को,
बदले ढेरों कार्बन डाईओक्साइड दिया
तो कभी लकडी ली पेड़ों से
बिल्डिंग फर्नीचर बनाया,
किया वो जो मर्जी आया,
बदले में ग्लोबल वार्मिंग करवाया
पर्यावरण का संतुलन गड़बड़ाया,
असमय बरसात, बाढ सुखा सब आया
ग्रीन हाउस इफेक्ट से परेशानी उठाया
ओजोन लेयर मे होल बनवाया,
फिर पृकृति में असन्तुलन करवाया,
कभी अति ग्रीष्म,तो कभी अति वृष्टि
और कभी सर्द के चक्र से,
बाहर ना निकल पाया।
चलो पर्यावरण दिवस पर
आज ये संकल्प लेते हैं,
हर व्यक्ति एक पौधा लगाये,
पृकृति का संतुलन वापस लाये,
अपने आने वाली पीढी को
शुद्ध हवा का तोहफा दे जाये।।

          ,,,,,,,,,,,,डॉली मिश्रा "पल्लवि"
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