मानस ....मानस...…....कराहती दर्द भरी आवाज।
कौन.........?
गहराती अंधेरी रात ,लैंप की हल्की रोशनी ।
मानस गहन एकाग्रता से अपनी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लीन था,लेकिन अचानक ये आवाज जो उसका नाम पुकार रही, ने मानस की तल्लीनता को भंग कर दिया।
मानस उठकर आवाज की दिशा की ओर बढ़ा,लेकिन आवाज आनी बंद हो गई।
"क्या कोई बहुत मुसीबत में है,पर यहां कौन मेरा नाम लेकर पुकारेगा??"
मानस मन ही मन सोचने लगा,पढ़ाई से मन एकदम उचट गया।
मानस को अभी यहां आए महज चार पांच ही दिन बीते थे।इस हवेली को मानस ने बहुत सस्ते में किराए पर लिया था।
तीव्र बुद्धि के मानस ने आईएएस बनने के सपने देखे थे ,उसी की तैयारी के लिए वो छोटे शहर से दिल्ली आया था।
बड़े शहर में रहने की समस्या ज्यादा होती है इसके लिए उसने अपने एक दोस्त से संपर्क किया ,तो उसने उसे ये हवेली सस्ते में दिलवा दी।इस हवेली को कोई किराए में लेता नहीं था,बहुत सी कहानियां इस हवेली के बारे में प्रसिद्ध थी।
मानस के दोस्त ने समझाया , कि कभी कभी किसी प्रॉपर्टी को बिकने नहीं देने के लिए विरोधी झूठा प्रचार करा ,लोगों को डरा देते हैं,ताकि कोई ऐसी प्रॉपर्टी न खरीदे।
लेकिन ,हवेली देते समय वहां के मालिक ने बेसमेंट में बने एक कमरे की ओर इशारा कर ,उसे न खोलने की हिदायत दी थी ,उस कमरे में बहुत पुराना ताला लगा था।
यह हवेली वैसे तो सुनसान स्थान पर थी ,फिर भी कोचिंग सेंटर जाने में सिर्फ आधा घंटा ही लगता था।
मानस जी जान से परीक्षा की तैयारी में जुटा था ,इसलिए वह देर रात तक पढ़ाई करता था।
दो तीन दिन तक वह रहस्यमई आवाज ,नही सुनाई पड़ी,मानस ने भी उस आवाज को अपना वहम मान लिया ,और पूरे जी जान से अपनी पढ़ाई में जुट गया।
रात के करीब 3बजे थे ,अब मानस पढ़कर उठने ही वाला था,तभी वही कराहती आवाज फिर उसके कानों में टकराई,बाहर झांक कर देखा, घनघोर अंधेरा था,यदा कदा कुतों की भौंकने की तेज आवाज ,रात की नीरवता तोड़ देती थी।
यह आवाज तो बेसमेंट के कमरे से आ रही।मानस डर गया,उसे मकान मालिक की चेतावनी याद आ गई।किसी तरह उसने डर डरकर रात काटी।
सुबह देर से नींद खुली,दिन चढ़ आया था।जल्दी जल्दी काम निपटाया ,आज रविवार था, कोचिंग का ऑफ,मानस ने अपने दोस्त नीरज को फोन किया।
हैलो नीरज_यार तू मेरे घर आ जा। मानस ने कहा।
क्यों क्या बात है,इतना घबराया सा क्यों ह?,चल अभी 1घंटे में यहां के मशहूर दही भल्ले लेकर आता हूं,आज अवकाश का भरपूर आनंद लेते हैं।
अच्छा ,आ ,मैं भी तेरी मनपसंद वेज बिरयानी बना लेता हूं ।
लगभग 1घंटे में नीरज दही भल्ले के साथ ,मानस के सामने हाजिर था।
मानस का चेहरा मुरझाया था,उसने बीते कुछ दिनों और कल की बात नीरज को बताई।
नीरज भी गंभीर हो गया।दोनों उठकर बेसमेंट में गए ,वहां कमरे के दरवाजे के पास पहुंचे,बड़ा सा जंग लगा ताला , उन्हें मुंह चिढ़ा रहा था।
नीरज ने कहा ,"देख मानस डर कर तू पढ़ाई कर भी नहीं पा रहा। आज इस कमरे का ताला तोड़ रहस्य से पर्दा उठा ही लेते हैं , ,क्यों क्या ख्याल है तेरा?"
तू सही कहता है मेरे भाई ,यूं डर कर मैं पढ़ाई कर भी नहीं पा रहा हूं , घर परिवार को छोड़ जिस लक्ष्य के लिए आया हूं।
लेकिन मैं ताला तोड़ने की बात से सहमत नहीं हूं।तेरी नज़र में कोई चाभी बनाने वाला है क्या??
हम उससे इसकी दूसरी चाभी बनवा लेते हैं।
ठीक है ,मैं अभी ही चाभी वाले को बुला कर लाता हूं,यहीं कुछ दूर पर ही तो है।
खाना खा ,नीरज चाभी वाले को ले आया।चाभी वाला अगले दिन शाम तक चाभी बनाने की बात कह चला गया।
अगले दिन शाम तक जब चाभी वाला नही आया तो , दोनों दोस्त उसके घर पहुंच गए,वहां देखा तो नजारा कुछ और ही था।
क्या हुआ होगा चाभी वाले के साथ,चाभी मिली या नहीं ,कमरे का रहस्य खुलेगा या नहीं ,जानने के लिए लिए देखिए _
दूसरा भाग।

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