तेरी यादों के तूफ़ान
मेरे मन - मन्दिर में चलें
आह की एक हवा इधर से बहे
दर्द की एक आँधी उधर से चलें
लें जायें उड़ाकर मुझें
तेरी बाहों में छोड़ आयें
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तेरी यादों के मेघ
मेरे मन - मन्दिर में बरसे
स्नेह की एक बूंद इधर से गिरे
प्रेम की एक फुहार उधर से पड़े
भिगो कर मुझें तेरे प्यार में
दिल की जमीं से मिले
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तेरी यादो के सैलाब
मेरे मन - मन्दिर में उठे
विरह की एक तरंग इधर से उठें
तड़प की एक लहर उधर से चलें
साहिल से टकराकर
दोनों जाकर सागर में मिले
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तेरी यादों के चिराग़
मेरे मन मन्दिर में जले
स्मृति की एक लौ इधर से जले
ख्यालों की एक किरन उधर से दिखें
दोनों भोर में जब मिले प्रकाश पुंज बने
..........@ नेहा धामा " विजेता "

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