तेरी मन मोहनी सूरत, मेरे दिल को  लुभाती है|
तेरे गजरे की ये खुशबू मेरा   मन मोह  लेती है|

चले तेरे नैनों के जो तीर मेरा   दिल हुआ घायल |
मेरा मन झूमने लगता है जब खनकाती हो पायल|

चमन में फूल खिल जाते हैं जो तू मुस्कराती है |
तेरी मन मोहनी सूरत  मेरे दिल को  लुभाती है |

मैं हरपल खोया रहता हूंँ तुम्हारे ही ख्यालों में |
मैं हरदम देखता रहता हूँ तेरे घर की  राहों में |

मुझे अब हर घड़ी हर पल सदा तेरी याद आती है|
तेरी मन मोहनी सूरत   मेरे दिल को  लुभाती है |

गुलाबी ओष्ठ तेरे लग रहे जैसे कोई   गुलकंद |
भ्रमर बन के चुरा लूँ मैं तेरे अधरों से ये मकरंद |

तेरे अधरों की ये तपिश मेरे हिय को जलाती है |
तेरी मन मोहनी सूरत मेरे दिल को लुभाती है |
                   हनुमान कुमार