बताती हूँ मैं एक अंतर पिता और पति के घर की.......।
   एक दिन उँगली काट गयी पिता के घर,
पिताजी बोले"अरे"जल्दी लाओ दवाई
दर्द हो रहा मेरी लाडो को भाई.......।

दवाई के साथ प्यार की पट्टी भी लग रही थी,
रोते हुए चेहरे को हँसाने का प्रयास किया जा रहा था😊
तू तो मेरी बहादुर बिटिया है कुछ नहीं होगा,
ये छोटा सा जख्म है तुरंत भर जाएगा.........।

भूल गयी मैं अपना दर्द देख के इतना प्यार,
चाहे उम्र ढल जाए पर कम ना होता पिता का प्यार......।

एक दिन फिर कटी उँगली पति के घर,
"काट ली उँगली "सब्जी काटने भी नहीं आती
अरे"कुछ तो सीख के आती,,,🙂
लगता है अब मुझे ही सिखाना पड़ेगा
कट गई उँगली तो चलो अब दवाई लगाना पड़ेगा.....।

देख के"ऐसा प्यार फिर भूल गई अपना दर्द यार,
भावनाओं का भी अंतर होता है यार
हाँ करते हैं ...मुझे बहुत प्यार😊❤
सारी फरमाइशें पूरी करने को रहते तैयार
फिर भी कुछ तो अंतर होता है यार,
कुछ तो अंतर होता है यार..............।

अब एक महत्वपूर्ण बात हूँ बताती,
एक घर की हूँ राजकुमारी,एक घर की हूँ रानी😊
अगर दोनों घर से मिलता एक जैसा प्यार
तो इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे निभा पाती..........।

एक घर से लाड़ प्यार,
  एक घर में जिम्मेदारी वाला प्यार☺
बस यही अंतर होता है यार,
बस यही अंतर होता है यार.............।☺😊🙏❤
                           ऋचा कर्ण✍